स्तोत्र ग्रन्थ : अध्याय 131
1) प्रभु! मेरे हृदय में अहंकार नहीं है। मैं महत्वाकांक्षी नहीं हूँ। मैं बड़ी-बड़ी योजनाओं के फेर में नहीं पड़ा और मैंने ऐसे कार्यों की कल्पना नहीं की, जो मेरी शक्ति से परे हैं।
2) माँ की गोद में सोये हुए दूध-छुड़ाये बच्चे के सदृश मेरी आत्मा शान्त और मौन है। ठीक उसी बच्चे की तरह मेरी आत्मा मुझ में है।
3) इस्राएल! प्रभु पर भरोसा रखो, अभी और अनन्त काल तक!
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