स्तोत्र ग्रन्थ : अध्याय 67
2) (१-२) ईश्वर हम पर दया करे और हमें आशीर्वाद दे। वह हम पर दयादृष्टि करे,
3) जिससे पृथ्वी पर तेरे मार्ग का और राष्ट्रों में तेरे मुक्ति-विधान का ज्ञान हो।
4) ईश्वर! राष्ट्र तुझे धन्यवाद दें। सभी राष्ट्र मिल कर तुझे धन्यवाद दें।
5) सभी राष्ट्र उल्लसित हो कर आनन्द मनायें, क्योंकि तू न्यायपूर्वक संसार का शासन करता और पृथ्वी पर राष्ट्रों का पथप्रदर्शन करता है।
6) ईश्वर! राष्ट्र तुझे धन्यवाद दें। सभी राष्ट्र मिल कर तुझे धन्यवाद दें।
7) पृथ्वी ने अपनी उपज प्रदान की। ईश्वर, हमारा ईश्वर हमें आशीर्वाद देता है।
8) ईश्वर हमें आशीर्वाद प्रदान करता रहे और समस्त पृथ्वी उस पर श्रद्धा रखे।
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