बारूक का ग्रन्थ : अध्याय 1
1) यह वह ग्रन्थ है, जिसे बारूक ने बाबुल में लिखा था। बारूक नेरीया का पुत्र था, नेरीया महसेया का, महसेया सिदकीया का, सिदकीया हसद्या का और हसद्या लिकीया का।
2) येरुसालेम के खल्दैयियों के अधिकार में आने और उनके द्वारा भस्म किये जाने के पाँचवें वर्ष, महीने के सातवें दिन, उसने यह ग्रन्थ लिखा था।
3) उसने उसे यहोयाकीम के पुत्र, यूदा के राजा यकोन्या के सामने पढ़ कर सुनाया और उन सब लोगों के सामने, जो इस ग्रन्थ का पाठ सुनने आये थे।
4) वे ये थेः पदाधिकारी, राजकुमार, नेता और छोटों से बड़ों तक अन्य सब लोग, जो सदू नदी के तट पर बाबुल में बसे थे।
5) उन लोगों ने शोक मनाया, उपवास किया और प्रभु से प्रार्थना की।
6) फिर उन्होंने अपनी-अपनी शक्ति के अनुसार चन्दा एकत्र किया
7) और उसे शल्लूम के पौत्र, हिलकीया के पुत्र, याजक यहोयाकीम तथा अन्य याजकों और सारे लोगों के पास येरुसालेम भेजा, जो उसके साथ वहाँ थे।
8) इस से पूर्व बारूक ने प्रभु के मन्दिर से चुरायी हुई सामग्रियाँ ग्रहरण की थीं और इन्हें सीवान मास के दसवें दिन यूदा प्रदेश को लौटना चाहता था। वे चाँदी के पात्र थीं, जिन्हें यूदा के राजा, योशीया के पुत्र, सिदकीया ने उस समय बनवाया था,
9) जब बाबुल का राजा नबूकदनेजर यहोयाकीम को पदाधिकारियों, कारीगरों, नेताओं और प्रजा के साथ येरुसालेम से ले कर बाबुल चला गया था।
10) बाबुल के लोगों ने यह सन्देश भेजाः देखिए, हम आप को यह चन्दा भेज रहे हैं। इस द्रव्य से होम-बलियाँ, प्रायश्चित-बलियाँ, लोबान और अन्न-बलियाँ तैयार कर अपने प्रभु-ईश्वर की वेदी पर चढायें।
11) बाबुल के राजा नबूकदनेजर और उसके पुत्र बलतासार के लिए प्रार्थना करें कि वे तब तक जीते रहें, जब तक आकाश पृथ्वी के ऊपर स्थित रहे।
12) आप प्रार्थना करें कि प्रभु हमें शक्ति और विवेक प्रदान करे, जिससे हम बाबुल के राजा नबूकदनेजर और उसके पुत्र बलतासार की छाया में सुरक्षित रह सकें, दीर्घ काल तक उनकी सेवा करते हुए उनके कृपापात्र बने रहें।
13) आप हमारे लिए भी प्रभु-ईश्वर से प्रार्थना करें, क्योंकि हमने उसके विरुद्ध पाप किये और आज तक प्रभु का प्रकोप और क्रोध हम पर से दूर नहीं हुआ है।
14) जो ग्रन्थ हम आपके पास भेज रहे हैं, आप उसे पर्व के दिन और अन्य उचित दिनों के अवसर पर प्रभु के मन्दिर में पढ़ कर सुनायें।
15) (१५-१६) आप लोग यह कहें: हमरा प्रभु-ईश्वर न्यायी है और हम, यहूदिया के लोग, येरुसालेम के निवासी, हमारे राजा और शासक, हमारे याजक और नबी, हमारे पूर्वज- हम सब-के-सब कलंकित हैं;
17) क्योंकि हमने प्रभु के विरुद्ध पाप किया है।
18) हमने उसके आदेशों का पालन नहीं किया और हमने अपने प्रभु-ईश्वर की वाणी पर ध्यान नहीं दिया, जिससे हम उसकी आज्ञाओं के अनुसार आचरण कर सकें, जो प्रभु ने हमें दी थीं।
19) जिस दिन प्रभु हमारे पूर्वजों को मिस्र से निकाल लाया, उस दिन से आज तक हम उसकी आज्ञाएँ भंग करते और उसकी वाणी का तिरस्कार करते आ रहे हैं।
20) इसलिए आज वे विपत्तियाँ और अभिशाप हम पर आ पड़े हैं, जिन्हें प्रभु ने अपने सेवक मूसा द्वारा घोषित किया था, जब वे हमारे पूर्वजों को मिस्र से निकाल कर उस देश में जा रहे थे, जहाँ पहले की तरह आज भी दूध और मधु की नदियाँ बहती हैं।
21) हमने प्रभु द्वारा भेजे हुए नबियों की वाणी पर ध्यान नहीं दिया।
22) हम दुष्टतापूर्वक अपनी राह चलते रहे, पराये देवताओं की उपासना और ऐसे कार्य करते रहे, जो हमारे प्रभु-ईश्वर की दृष्टि में बुरे हैं।
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