यूदीत का ग्रन्थ : अध्याय 2
1) अठाहरवें वर्ष के पहले महीने के बाईसवें दिन, अस्सूरियों के राजा नबूकदनेजर के महल में इसकी चरचा हुई कि वह अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार उन सभी देशों में बदला लेगा।
2) उसने अपने सब दरबारियों और अपने सब उच्च पदाधिकारियों को एकत्रित कर एकान्त में उन्हें अपना निर्णय बताया कि वह अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार उन सब देशों का विनाश करेगा।
3) उन्होंने भी इस निर्णय का समर्थन किया कि उन सब का सर्वनाश किया जाये, जिन्होंने उसकी आज्ञा की अवहेलना की थी।
4) इस सभा के बाद अस्सूरियों के राजा नबूकदनेजर ने अपने प्रधान सेनापति होलोफ़ेरनिस को, जिसका उसके बाद दूसरा स्थान था, बुलाया
5) और उस से कहा, ''समस्त पृथ्वी के राजाधिराज की आज्ञा हैः तुम यहाँ से विदा हो कर अपने साथ ऐसे व्यक्तियों को ले जाओ, जिन को अपने बल पर भरोसा हो। तुम एक लाख बीस हजार पैदल सैनिकों और बारह हजार घुड़सवारों को ले कर
6) सारे पश्चिमी देशों पर इसलिए आक्रमण करोगे कि उन्होंने मेरे आदेश की अवहेलना की थी।
7) तुम उन्हें यह आज्ञा भी दोगे कि वे अधीनता स्वीकार करें। नहीं तो मैं क्रुद्ध हो कर उन पर आक्रमण करूँगा और पृथ्वी को अपनी सेना से पाट कर उन्हें लुटवाऊँगा।
8) उनके घायलों से घाटियाँ भर जायेंगी और उनके मृतकों की लाशों से नाले और नदियाँ इस प्रकार प्रकार पट जायेंगी कि पानी उनके तट के ऊपर से बह निकलेगा।
9) मैं उनके बन्दियों को पृथ्वी के कोनों तक ले जाऊँगा।
10) तुम जा कर मेरे लिए उन लोगों के सभी सीमान्तों पर अधिकार करोगे। जब वे तुम्हें अपने को समर्र्पित करेंगे, तो उन्हें मेरे लिए उस दिन तक रख छोड़ोगे, जिस दिन मैं स्वयं उन को दण्ड देने जाऊँगा।
11) जो तुम्हारा विरोध करेंगे, तुम उन पर दया मत दिखाओगे। उन्हें सब जगह वध और लूट का शिकार होने दोगे ;
12) क्योंकि मैंने अपने जीवन और राज्याधिकार की शपथ खा कर जो कहा है, मैं उसे अवश्य पूरा करूँगा ।
13) तुम अपने स्वामी की इन आज्ञाओं में एक का भी उल्लंघन नहीं करोगे, बल्कि जैसा मैंने आदेश दिया, उसका बिना विलम्ब किये अवश्य पालन करोगे।''
14) होलोफ़ेरनिस ने अपने स्वामी से विदा ले कर सब सामन्तों और अस्सूर की सेना के सेनापतियों और अध्यक्षों को बुलाया
15) और अपने स्वामी के आदेशानुसार युद्ध के लिए उत्तम सैनिकों को चुना-एक लाख बीस हजार पैदल सैनिकों और बारह हजार घुड़सवार तीरन्दाजों को-ह्ढ
16) और युद्ध के लिए उनकी व्यूहरचना की।
17) वह इनके साथ बहुत से ऊँटों, गधों और खच्चरों को माल-असबाब लादने के लिए तथा असंख्य भेड़ों, गायों और बकरियों को रसद के लिए ले गया।
18) उसने प्रत्येक सैनिक के लिए भरपूर भोज्य-पदार्थ का प्रबन्ध किया और राजभवन से प्रचुर मात्रा में सोना-चाँदी निकलवायी।
19) इस प्रकार वह अपनी सारी सेना के साथ राजा नबूकदनेजर से पहले नीनवे से चल पड़ा, जिससे वह सभी पश्चिमी देशों को अपने रथों, घुड़सवारों और चुने हुए पैदल सैनिकों से भर दे।
20) उनके साथ हर प्रकार के अन्य लोग भी थे, जो टिड्डियों और पृथ्वी के रेतकणों की तरह असंख्य थे।
21) वे नीनवे की तीन दिन की यात्रा की दूरी तक, बेकटिलेत के मैदान तक गये और उन्होंने बेकटिलेत के पास, जो उस पर्वतश्रेणी के निकट है जो किलीकिया के ऊपरी भाग में अवस्थित है, पड़ाव डाला।
22) फिर वह अपनी सारी सेना-पैदल सैनिक, घुड़सवार और रथ-ले कर वहाँ से पहाड़ी प्रान्त की ओर आगे बढ़ा।
23) पूद और लूद वालों को पराजित कर उसने रस्सीद के सभी वंशजों और इसमाएलियों को लूटा, जो खलैयों के देश के दक्षिण में उजाड़खण्ड के निकट रहते हैं।
24) इसके बाद वह फ़रात नदी पार कर मेसोपोतामिया हो कर गया और समुद्र तक आगे बढ़ कर अब्रोना नदी के पास के सब क़िलाबन्द नगरों को ध्वस्त कर दिया।
25) उसने किलीकिया प्रान्त पर अधिकार कर लिया और अपने सब विरोध करने वालों का वध किया। इस प्रकार वह याफ़ेत की सीमा तक आया, जो दक्षिण में अरब के सामने है।
26) इसके बाद उसने मिदयान के सभी वंशजों को घेर कर उनके खेमों को जला दिया और उनके रेवड़ों को लूटा।
27) तब वह गेहूँ की फ़सल के समय दमिश्क के मैदान में उतरा और उसने उनके सब खेत जला दिये, उनका पशुधन नष्ट किया, उनके नगरों को लूटा, उनके मैदान उजाड़ दिये और उनके सब नौजवानों को तलवार के घाट उतार दिया।
28) तब समुद्रतट के लोग, सीदोन और तीरुस के निवासी, सूर और ओकीना के निवासी तथा यमनिया के सब निवासी भयभीत हो कर काँपने लगे। अशदोद और अशकलोन के निवासी उस से बहुत डरने लगे।