इसायाह का ग्रन्थ : अध्याय 60
1) ''उठ कर प्रकाशमान हो जा! क्योंकि तेरी ज्योति आ रही है और प्रभु-ईश्वर की महिमा तुझ पर उदित हो रही है।
2) पृथ्वी पर अँधेरा छाया हुआ है और राष्ट्रों पर घोर अन्धकार; किन्तु तुझ पर प्रभु उदित हो रहा है, तेरे ऊपर उसकी महिमा प्रकट हो रही है।
3) राष्ट्र तेरी ज्योति की ओर आ रहे हैं और राजा तेरे उदीयमान प्रकाश की ओर।
4) ''चारों ओर दृष्टि दौड़ा कर देख! सब मिल कर तेरे पास आ रहे हैं। तेरे पुत्र दूर से चले आ रहे हैं; लोग तेरी पुत्रियों को गोद में उठा कर लाते हैं।
5) यह देख कर तू प्रफुल्लित हो उठेगी; तेरा हृदय आनन्द से उछलने लगेगा; क्योंकि समुद्र की सम्पत्ति और राष्ट्रों का धन तेरे पास आ जायेगा।
6) ऊँटों के झुण्ड और मिदयान तथा एफ़ा की साँड़नियाँ तुझ में उमड़ पड़ेंगी; शबा के सब लोग, प्रभु की स्तुति करते हुए, सोने और लोबान की भेंट ले आयेंगे।
7) केदार की सब भेड़-बकरियाँ तेरे पास इकट्टी हो जायेंगी, नबायोत के मेढ़े तेरी सेवा में उपस्थित होंगे। वे चढ़ावे के रूप में मेरी वेदी पर स्वीकार किये जायेंगे। मैं अपना भव्य मन्दिर महिमान्वित करूँगा।
8) ''वे कौन हैं, जो उड़ते हुए बादलों, अपने दरबों की ओर उड़ने वाले कपोतों की तरह आ रहे हैं?
9) द्वीपों के बेड़े मेरे पास आ रहे हैं, तरशीश के जहाज सब से आगे हैं। वे तेरे पुत्रों को दूर-दूर से ले आते हैं और चाँदी और सोने से लदे हुए हैं, जिससे वे तेरे प्रभु-ईश्वर का आदर करें, इस्राएल के उस परमपावन ईश्वर का, जिसने तुझे अपनी महिमा प्रदान की है।
10) विदेशी तेरी दीवारें फिर उठायेंगे और उनके राजा तेरी सहायता करेंगें। मैंने अपने क्रोध में तुझे मारा था। अब मैं प्रसन्न हो कर तुझ पर अपनी अनुकम्पा प्रकट करूँगा।
11) तेरे फाटक निरन्तर खुले रहेंगे। वे दिन-रात कभी बन्द नहीं होंगे, जिससे लोग अपने राजाओं के नेतृत्व में राष्ट्रों की सम्पत्ति तेरे यहाँ ला सकें।
12) जो राष्ट्र या राज्य तेरी सेवा नहीं करेंगे, उनका पतन और विनाश होगा।
13) लेबानोन की महिमा तेरे यहाँ आयेगी- सनोवर, देवदार और चीड़। वे मेरे मन्दिर की शोभा बढ़ायेंगे। मैं अपने पावदान को महिमान्वित करूँगा।
14) तेरे अत्याचारियों के पुत्र सिर झुकाये तेरे पास आयेंगे। जो तेरा तिरस्कार करते थे, वे तेरे चरणों को प्रणाम करेंगे। वे तुझे 'प्रभु की नगरी' और 'परमपावन ईश्वर का सियोन' कह कर पुकारेंगे।
15) ''तेरा परित्याग और तुझ से बैर किया गया था, तेरे पास हो कर कोई नहीं जाता था। मैं तुझे सभी आने वाली पीढ़ियों का गौरव और आनन्द का स्रोत बनाऊँगा।
16) तू राष्ट्रों का दूध पियेगी और राजाओं की सम्पत्ति लूटेगी। तू जान जायेगी कि मैं, प्रभु, तेरा मुक्तिदाता, याकूब का अजेय ईश्वर हूँ, जो तुम्हारा उद्धार करता है।
17) मैं तुझे काँसे के बदले सोना, लोहे बदले चाँदी, लकड़ी के बदले काँसा और पत्थर के बदले लोहा दिलाऊँगा। मैं शान्ति को तेरा निरीक्षक और न्याय को तेरा पदाधिकारी बनाऊँगा।
18) तेरे प्रदेश में न तो हिंसा की चरचा होगी और न तेरे सीमान्तों में विध्वंस और विनाश की। तू अपनी चारदीवारी का नाम 'मुक्ति' और अपने फाटक का नाम 'स्तुति' रखेगी।
19) तुझे न तो दिन में सूर्य के प्रकाश की और न रात में चाँदनी की आवश्यकता होगी। प्रभु सदा के लिए तेरा प्रकाश होगा और ईश्वर तेरी दीप्ति।
20) तेरा सूर्य कभी अस्त नहीं होगा, तेरा चन्द्रमा, कभी लुप्त नहीं होगा; क्योंकि ईश्वर ही होगा तेरा सदा बना रहने वाला प्रकाश। तेरे शोक के दिन समाप्त हो जायेंगे।
21) तेरी समस्त प्रजा सदाचारी होगी। देश पर उसका अधिकार सदा बना रहेगा। मैंने अपनी महिमा प्रकट करने के लिए उसे अपने हाथों से पौधे की तरह रोपा है।
22) उस में प्रत्येक से एक हजार उत्पन्न होंगे और सबसे दुर्बल से एक शक्तिशाली राष्ट्र। मैं, प्रभु, उचित समय पर यह अविलम्ब पूरा करूँगा।''