येसु के परम पवित्र हृदय की भक्ति

गुणानुवाद
अगुआ: हे येसु के परमपवित्र हृदय! बड़ी दीनता के साथ मैं तेरी आराधना करता हूँ। तू तो मेरे प्रभु और मुक्तिदाता का हृदय है जो सम्पूर्ण आदर और आराधना के सर्वथा योग्य है। तू परमेश्वर का पूजनीय मंदिर है जिस में उसकी अनन्त आराधना की जाती है।
सब:    आदर, प्रेम और प्रशंसा होवें, येसु के परम पवित्र हृदय की।
            (प्रत्येक बार दोहराइये)
अगुआ: हे येसु के हृदय! तू अत्यन्त प्रशंसनीय है, क्योंकि तू परमेश्वर का राज–महल है जिस में से वह स्वर्ग और पृथ्वी पर राज्य करता है।
            -तू परमेश्वर को अत्यन्त प्रिय है क्योंकि तू सृष्टि का सब से मनोहर कमल है, जो अपनी सुन्दरता और सुगंध से परमेश्वर को प्रसन्न करता रहता है।
            -तू परम पूजनीय है क्योकि तू वही बलिदान का कटोरा है जिस में हम मनुष्यों की मुक्ति के लिये हमारे प्रभु ने परमेश्वर को अपना बहुमूल्य रक्त चढ़ाया था। 
            -तू वही कृपा का अथाह सागर है, जिससे दीन–दरिद्र मनुष्यों को अमर जीवन प्राप्त होता है।
            -तू परमेश्वर की जीवित वेदी है जिस प्रचंड प्रेमाग्नि के कारण प्रभु येसु ने मनुष्यों की मुक्ति के लिये अपने आप को बलि चढ़ाया।
           -तू ईश्वरीय सत्य का सूर्य है, जो इस जीवन के अंधकार में, स्वर्ग–पथ को निरंतर आलोकित करता है।
            -मेरे ही प्रेम के कारण तूने अपने आपको भाले से छेदने दिया ताकि मैं विपत्ति के समय तेरी शरण में आ सकूँ। 
            -तू अत्यन्त दयालु और भला है क्योंकि मेरे अपराधों को नष्ट करने के लिये तूने अंतिम बूँद तक अपना रक्त बहाया। 
             -तू वह सुन्दर पुल है जिस पर चढ़कर हम परमेश्वर तक पहुँच सकते हैं। 
             -हमारे लिए तेरे सिवा ईश्वर के पास जाने का कोई दूसरा साधन नहीं है।
प्रार्थना: हे प्रभु येसु ! मुझ पर, इस लोक में अपने हृदय का प्रताप अधिक से अधिक मात्रा में प्रकट कर तथा मेरे हृदय में अपने प्रेम की अग्नि सुलगा दे। अपनी कृपा से मुझे स्वर्ग–लोक में पहुंचाईये जहाँ मैं स्वर्गदूतों और संतों के साथ आपके परम पवित्र हृदय का इस प्रकार सदा गुणानुवाद किया करूँगा।  आमेन।
(भजन)
 
येसु के परम पवित्र हृदय से समर्पण–प्रार्थना
अगुआ: हे मधुर येसु, मनुष्य जाति के त्राणकत्र्ता! हम पर दृष्टि ड़ालिए जो आपकी वेदी के सामने बड़ी दीनता के साथ दंडवत्  करते हैं। हम आपके हैं और आपके ही रहना चाहते हैं। इससे भी अधिक आप से संयुक्त होने के लिए अब हम में से प्रत्येक व्यक्ति प्रसन्नतापूर्वक अपने आपको आपके परम पवित्र हृदय को आत्मसमर्पण करता है।
सब:    अनेक व्यक्तियों ने आपको कभी भी नहीं जाना और अनेकों ने आपकी आज्ञाओं को तुच्छ जान, आपको त्याग दिया। हे परम दयालु येसु ! उन पर दया कीजिए और उन सबको अपने पवित्र हृदय की ओर आकर्षित  कीजिए।
अगुआ: हे प्रभु !  आप राजा हैं केवल उन विश्वासियों के ही नहीं, जो कभी आपसे दूर न हटे, किन्तु उन कुपुत्रों के भी जिन्होंने आपको छोड़ दिया है। ऐसा करें कि वे शीघ्र ही अपने पितृ–गृह में पुन: लौट आवें, ताकि वे कंगाली और भूख से बरबाद न हो।
सब:    हे प्रभु ! अपनी कलीसिया को सुरक्षा, स्वतंत्रता और कुशलता दें। सब राष्ट्रों को सुख और शांति प्रदान करें। पृथ्वी के एक धु्रव से दूसरे धु्रव तक यही एक शब्द सुनने में आवे कि जिस से हमारी मुक्ति हुई है उस ईश्वरीय हृदय की जय हो ! अनन्त काल तक उसकी महिमा और स्तुति होती रहे।  आमेन।

 

येसु के परम पवित्र हृदय से परिवारों की प्रायश्चित्–प्रार्थना
(महीने के पहले शुक्रवार के लिए)
अगुआ: हे मधुर येसु ! आप मनुष्यों से असीम प्रेम करते हैं। किन्तु फिर भी कितने लोग आपको भूल जाते हैं, कितने ही लोग आप की परवाह नहीं करते और आपको तुच्छ मानते हैं। हम आपकी इस वेदी के सामने दंड़वत् करके आपके परम पवित्र हृदय को मनुष्यों की इस दुष्ट उदासीनता एवं अपमान का बदला देना चाहते हैं।
सब :  हमें इसका भारी दु:ख है कि हमने भी कभी आपका अपमान किया। इसलिये हम पहले–पहल अपने ही लिये आप से क्षमा माँगते हैं। आज हम अपने अपराधों के लिये प्रायश्चित करके प्रसन्नता–पूर्वक उनका बदला देने को तैयार हैं। किन्तु हम केवल अपने ही अपराधों के लिये नहीं, प्रत्युत उन सब मनुष्यों के लिये भी बदला देना चाहते हैं, जो मुक्ति–मार्ग से दूर भटक रहे हैं। चाहे वे अविश्वास में दृढ़ होकर आपको अपना चरवाहा और पथ–प्रदर्शक मानने से इन्कार करते हों ; चाहे उन्होंने बपतिस्मा संस्कार की प्रतिज्ञाएँ भंग करके आपके धर्म का मधुर जूआ उतार फेंका हो।

 

परम पवित्र हृदय से आह्वान–प्रार्थना

हे प्रभु, ........ हम पर दया कर।
हे ख्रीस्त, ........    हम पर दया कर।
हे प्रभु, ........ हम पर दया कर।
हे ख्रीस्त       ........ हमारी प्रार्थना सुन।
हे ख्रीस्त,   ........ हमारी प्रार्थना पूर्ण कर।
हे स्वर्गवासी पिता–ईश्वर, ........ हम पर दया कर।
हे पुत्र–ईश्वर, दुनिया के मुक्तिदाता,  ........ हम पर दया कर।
हे पवित्रात्मा ईश्वर,  ........ हम पर दया कर।
हे पवित्र त्रिएक परमेश्वर, ........  हम पर दया कर।
हे येसु के हृदय, सनातन पिता के पुत्र,
हे येसु के हृदय, जो पवित्रात्मा द्वारा कुँवारी मरियम के गर्भ में बनाया गया।
हे येसु के हृदय, जो वास्तव में ईश्वर के शब्द से मिला हुआ है।
हे येसु के हृदय, परमेश्वर के पवित्र मंदिर।
हे येसु के हृदय, सर्वप्रधान के तम्बू।
हे येसु के हृदय, परमेश्वर के भवन और स्वर्ग के द्वार।
हे येसु के हृदय, धर्म और प्रेम के निवास–स्थान।
हे येसु के हृदय, भलाई और प्रेम से परिपूर्ण।
हे येसु के हृदय, सर्वगुणों के अथाह सागर।
हे येसु के हृदय, सर्वप्रशंसनीय।
हे येसु के हृदय, सब हृदयों के राजा और केन्द्र।
हे येसु के हृदय, समस्त बुद्धि और ज्ञान के भण्ड़ार।
हे येसु के हृदय, पूर्ण ईश्वरत्व के निवास–स्थान।
हे येसु के हृदय, जिससे पिता अत्यन्त प्रसन्न हुआ है।
हे येसु के हृदय, जिसकी पूर्णता से हम सब को कृपाएँ प्राप्त हुई हैं।
हे येसु के हृदय, धर्मपुरखों की अभिलाषा।
हे येसु के हृदय, दया और धैर्य से परिपूर्ण।
हे येसु के हृदय, सब प्रार्थियों के उपकारी।
हे येसु के हृदय, जीवन और पवित्रता के स्रोत।
हे येसु के हृदय, हमारे पापों की प्रायश्चित–बलि।
हे येसु के हृदय, अपमानों से पीडि़त।
हे येसु के हृदय, जो हमारे अपराधों के कारण भाले से छेदा गया।
हे येसु के हृदय, मृत्यु–पर्यन्त आज्ञाकारी।
हे येसु के हृदय, समस्त सांत्वना के स्रोत।
हे येसु के हृदय, हमारे जीवन और पुनरूत्थान।
हे येसु के हृदय, शांति और मैत्री के दाता।
हे येसु के हृदय, अपने आश्रितों के उद्धारकर्ता।
हे येसु के हृदय, मरणासन्न लोगों की आशा।
हे येसु के हृदय, सब सन्तों के आनन्द।

हे परमेश्वर के मेमने, तू संसार के पाप हर लेता हैं।… हे प्रभु, हमें क्षमा कर।
हे परमेश्वर के मेमने, तू संसार के पाप हर लेता हैं। …हे प्रभु, हमारी प्रार्थना पूर्ण कर।
हे परमेश्वर के मेमने, तू संसार के पाप हर लेता हैं। …हम पर दया कर।

अगुआ: हे हृदय के नम्र और विनीत येसु!
सब: अपने ही हृदय के समान हमारे हृदयों को भी बना दे।

अगुआ:हम प्रार्थना करें (कुछ ठहर कर) :– हे सर्वशक्तिमान सनातन भगवान! अपने परम प्रिय पुत्र के हृदय पर दृष्टि डाल और इन गुणानुवादों तथा दंडचुकावों पर ध्यान दे, जिनको वह पापियों के नाम पर तुझे चढ़ाते हैं। तू अपने पुत्र येसु ख्रीस्त ही के नाम पर, जो तेरे साथ परमेश्वर होकर, पवित्रात्मा के साथ युगानयुग जीवित रहते और राज्य करते हैं, प्रसन्न होकर  हमें जो तेरी दया माँगते हैं, क्षमा कर।     आमेन।

येसु के परम पवित्र हृदय को परिवारों का समर्पण
(महीने के पहले शुक्रवार के लिए ’’हे येसु’’ से ’’अपवित्र करते हैं’’ तक)
हे येसु के पवित्रतम हृदय! तूने संत मार्गरेट मरियम से अपनी यही आकांक्षा प्रकट की थी कि तू काथलिक परिवारों पर ही राज्य करना चाहता है। तुझे प्रसन्न करने के लिये आज हम यहाँ एकत्रित होकर तुझे अपने परिवार का स्वामी और राजा स्वीकार करते हैं हम निश्चय करते हैं कि हम तेरे ही आदर्श के अनुसार व्यवहार किया करेंगे।  तूने जिन सद्गुणों के पालन से इस दुनिया को शांति देने की प्रतिज्ञा की है, उन सद्गुणों को अपने परिवार में भी हम विशेष रीति से पालेंगे और तूने जिस सांसारिक प्रभाव को दोष दिया था, उसे हम अपने परिवार से दूर ही रखेंगे।  इन सब शोचनीय अपराधों के लिये हम आपके सामने प्रायश्चित करने का प्रयत्न करेंगे। विशेषत: हम उन लोगों के स्थान में बदला देना चाहते हैं जो पवित्र शुद्धता के विरूद्ध अनुचित व्यवहार से पाप करते हैं और निर्दोष लोगों को पाप के जाल में फंसाने का प्रयत्न करते हैं; या जो रविवार अथवा हुक्म–पर्व के दिनों को अपवित्र करते हैं, अथवा आपकी, और आपके संतो की निन्दा करते हैं।  फिर कितने लोग संत पाप अथवा आपके पुरोहितों का अपमान करते हैं, आपके ईश्वरीय प्रेमयुक्त परमप्रसाद की परवाह नहीं करते अथवा उसे अयोग्य रीति से ग्रहण करके अपवित्र करते हैं। 

आपके ईश्वरीय आदर में जो क्षति होती है, आज हम उसकी पूर्ति करना चाहते हैं। अत: जो प्रायश्चित् आपने पहले क्रूस पर अपने पिता के सामने किया था और जो आप अब भी प्रतिदिन हमारी वेदियों पर पुन: किया करते हैं, वही प्रायश्चित् लेकर और कुवाँरी मरियम तथा सब सन्तों व धार्मिक विश्वासियों के पुण्य–फलों को मिलाकर हम आपको समर्पित करते हैं।  हम हृदय से यह प्रतिज्ञा करते हैं कि भविष्य में हम आपकी कृपा पर आशा रखकर उचित व्यवहार से आपके असीम प्रेम के प्रति मनुष्यों की उदासीनता और उनके दूसरे सब अपराधों का बदला देंगे। हम आप पर दृढ़ विश्वास करेंगे। हम निर्मल आचरण करेंगे। इसके अतिरिक्त यथाशक्ति हम दूसरे मनुष्यों को भी आपका अपराध करने से रोकेंगे और बहुत से अन्य लोगों को आपके अनुयायी बनाने की चेष्टा करेंगे। 

हे येसु के पवित्र हृदय, (महीने के पहले शुक्रवार के लिए उचित)  हम तुझ पर सरलतापूर्वक विश्वास करते हैं। इस विश्वास के द्वारा तू हमारे मनों पर राज्य कर। हम तुझे प्रेम करते हैं और बार–बार परमप्रसाद लेकर उस प्रेम की बत्ती को जलाये रखेंगे। इस प्रेम के द्वारा तू हमारे हृदयों पर राज्य कर।  हे ईश्वरीय हृदय! कृपया हमारे इस सम्मिलन में प्रधान–स्थान ग्रहण कर। हमारे सब कार्यों को अपना आशीर्वाद प्रदान कर तथा सब कठिनाईयों में साहस दे। हमें पवित्र आनन्द प्रदान कर और अपने सब दंड़ सहने की शक्ति दे। यदि हममें से कोई तुझे अप्रसन्न करता है तो तू उसे यहाँ तक स्मरण करा दे कि तू पछताते हुए पापी के लिए भलाई और दया का सागर हैं। अन्त में, जिस समय मृत्यु हमारे गृह में प्रवेश करे, तब मरणासन्न व्यक्ति और हम सब तेरे अनादि विधानों के सामने सिर झुकावेंगे। उस समय हमारे लिये यही विचार शांतिदायक होगा कि एक दिन हमारा सारा परिवार स्वर्ग में फिर एकत्रित होकर, तेरे उपकारों के बदले में अनन्त काल तक तेरी प्रशंसा और स्तुति करता रहेगा।  तेरी निष्कलंक माता, कुँवारी मरियम और धर्मात्मा संत यूसुफ़ हमारा यह समर्पण तेरे श्री चाणों में रखें और प्रति दिन हमें उसका स्मरण कराते रहें। हमारे राजा और पिता येसु के हृदय की जय! हे येसु के पवित्र हृदय! हमारे परिवारों की रक्षा कर।  हे येसु के पवित्रतम हृदय! हम पर दया कर।