स्वास्थ्य की माता वेलांकनी की नौरोजी प्रार्थना

पहला दिन
हे निष्कलंक कुँवारी ! ईश्वर के सर्वोत्तम सृष्टि : यह तो सच है कि सर्वशक्तिमान ईश्वर ने तुझ में अपनी महिमा दिखलाई। जिस प्रकार नोआ की नैया में ईश्वर ने हर प्रकार के जीव–जन्तु एवं मानव–प्राणी को एकत्रित किया था, उसी प्रकार उसने तुझे समस्त कृपाओं और ज्ञान की खान बनाई है। तू मानव–जाति का गौरव है तू संसार का सौन्दर्य है। तू ईश्वर का मन्दिर है। तू पवित्रत्व का उद्यान है। हम तेरी स्तुति करते हैं।
हम तुझसे सन्त पिता, पवित्र कलीसिया, सभी ख्रीस्त भक्त और अपने लिए भी प्रार्थना करते हैं। हे माता ! तू ही बालकों और अनाथों की रक्षिका है। हे पवित्र कुँवारी ! तू ही युवकों को दुराशा के प्रलोभनों से बचाकर सत्य धर्म पर चलाती है। हे निष्कलंक कुँवारी ! तू ही युवतियों के कौमार्य का जीवित आदर्श है। तू ही पतिव्रताओं का आदर्श है। तू ही विधवाओं का आसरा है, वृद्धों की शरण, गरीबों का धन, रोगियों का औषध और पीडि़तों का सहारा है।
हे स्वास्थ्य प्रद माता! हमें यह वरदान दे कि हम मरते घड़ी तक तुझपर आशा रखकर तुझसे प्रेम करते रहें। आमेन।
(स्वास्थ्य की माता की स्तुति विनती : पृष्ठ 58)

दूसरा दिन
हे दाउद कुल की ज्योति! हम पापी, तेरे ज्ञान का सौन्दर्य और प्रताप की कीर्ति देख आश्चर्यचकित हैं। तेरा पुत्र येसु दुरात्मा के अधिकार को और अज्ञान के अन्धकार को दूर करने वाला सूर्य है। तू उसकी उषा है। आज भी तू इस पवित्र स्थान से ईश्वरीय कृपा और पापों की क्षमा दिलाती है।
हे कृपा की माता! निष्कलंक कुँवारी! हमने असंख्य पाप किये है। पर अटल विश्वास के साथ तेरी शरण आते हैं। तुझ पर हमारा दृढ़ भरोसा है। हे दया के सागर! निष्कलंक माता! तेरा नाम हमारे लिए अमृत पान है, मधुर गीत है और सुगन्धित लोबान है। तू हमारे हृदय का आनन्द और प्रकाश है। मरते समय तेरा आवान हमारे लिए स्वर्ग–द्वार खोले। आमेन।
(स्वास्थ्य की माता की स्तुति विनती : पृष्ठ 58)

तीसरा दिन
हे हमारी प्रेमी माता ! हे सच्चरित्र के आदर्श! तुझे प्रणाम ! बचपन से ही तू माता–पिता के प्रेम से दूर हुई और संसार के सुख को तुच्छ समझकर तूने मन्दिर में प्रवेश किया। इससे तू हमें सिखाती है कि ईश्वर ही धन है और उसके प्रिय बना रहना ही सौभाग्य है। हमने बपतिस्मा के समय, धन, संसार और शैतान को छोड़ देने की प्रतिज्ञा की थी। फिर भी उस प्रतिज्ञा की अवहेलना करके हम सांसारिक सुख में लिप्त रहे और हमने पाप किये। ईश्वर से हमने मुख मोड़ा और नश्वर सुख की खोज की। उसके प्रेम को हमने ठुकराया।
हे करूणानिधि ! निर्मल कुँवारी ! हम अपने पापों से घृणा करते हैं। ऐसी दुर्दशा में हम किसकी शरण लें?  हम पथ–भ्रष्ट अन्धे की तरह भटक रहे हैं। क्या तू हमारा पथ प्रदर्शन नहीं करेगी ? हे प्रतापी माता! क्या तू हमें पार नहीं लगायेगी ? हाँ ! चाहे माँ अपने पुत्र को भूल जाये, पर तू हमें न भूल। हमें यह कृपा दिला कि प्रभु येसु के घाव, हमारी शरण और उसकी मृत्यु हमारा त्राण बने। आमेन।
(स्वास्थ्य की माता की स्तुति विनती : पृष्ठ 58)

चौथा दिन
हे पवित्र प्रेम की माता ! तू प्रभु येसु की माँ चुनी गई थी। इस पर हम आनन्द के साथ तेरी प्रशंसा करते हैं। देवदूत गब्रिएल की मंगलकामना को हम अपनाते हैं। प्रणाम मरिया ! तू कृपा पूर्ण है।  तू जब गर्भ में पड़ी, तभी ईश्वर ने तुझे सभी कृपाओं से सुसज्जित किया। बाद में तूने कृपाओं के दाता को ही गर्भ में लिया। तेरी स्तुति अपरम्पार है। हम पर इतनी दया कर कि हम तेरी स्तुति गाने योग्य बनें। – प्रभु तेरे साथ हैं – तेरी नम्रता के कारण प्रभु ने तुझे अपनी माता चुन लिया। तेरे निर्मल कौमार्य के कारण ही ईश्वर के पुत्र ने तेरे गर्भ में देहधारण करना स्वीकार किया। हे करूणामयी माता! हमारे लिए प्रार्थना कर कि जिस प्रकार ईश सुत तेरे गर्भ में आकर तुझसे मिला रहा, उसी प्रकार संस्कारों द्वारा वह हममें भी सदा निवास करे। – धन्य तू स्त्रियों में – आदि माता–पिता के कारण श्रापित स्त्रियों ने तुझसे आशीर्वाद पाया। तू स्त्रियों में सर्वश्रेष्ठ है। तू माताओं में पूज्यनीय हैं। सुन्दरियों में तू सुन्दरतम है। सभी पीढि़याँ तुझे धन्य कहेंगी। हम भी तुझे धन्य कहते हैं। तूने आशीर्वाद पाया है, हमें भी आशीर्वाद दिला। आमेन।
(स्वस्थ्य की माता की स्तुति विनती : पृष्ठ 58)

पाँचवाँ दिन
हे निष्कलंक कुँवारी ! कृपाओं के द्वार ! तेरे आगमन से संत एलिजबेथ और संत योहन ईश्वरीय कृपा के पात्र बने। आज इस स्थान पर हमें भी वही कृपा दिला। तेरी दया से, तेरे इस स्थान पर कई अन्धों ने दृश्य, बहरों ने श्रवण, रोगियों ने स्वास्थ्य, पीडि़तों ने ढ़ाढस और दुष्टों ने सुबुद्धि पाई है। कृपाओं की माता ! दया के सिंहासन ! तेरे द्वारा ईश्वर अपनी महिमा प्रकट करता है। जब–जब हम पापियों के लिए प्रार्थना करते हैं, तू हमारा साथ दे। प्रत्येक माता अपने पुत्र पर अधिकार रखती है। अत: तू प्रभु येसु से प्रार्थना कर कि अन्य धर्मी, कलीसिया से बिगड़े सभी ख्रीस्तीय भाई और बुरे ख्रीस्तीय, सत्य को जानें और मुक्ति पा सके, क्योंकि ये सब तेरी ही संतान हैं।  आमेन।
(स्वस्थ्य की माता की स्तुति विनती : पृष्ठ 58)

छठवाँ दिन
हे पूजनीय माता ! तेरा यथोचित कीर्तिगान कौन कर सकता है? तेरी महत्ता में सदा ही नवीनता है। इसलिए कि तू अलौकिक रूप से गर्भवती हुई और अपना कौमार्य रखते हुए तूने प्रभु येसु को जन्म दिया। हे परमेश्वर की माता ! तुझे प्रणाम ! तू सदा ही कुँवारी रही – गर्भधारण के पूर्व, गर्भधारण करते समय और उसके बाद भी। तू स्वर्गलोक का आनन्द है। हे दैवी फूल ! प्रभात के तारे! तेरी गोद के बालक की आराधना करते हुए हम तेरी स्तुति गाते हैं। क्योंकि प्रभु ख्रीस्त हमारे राजा हैं और तू हमारी रानी हैं। प्रभु येसु ईश्वर और मनुष्य के मध्यस्थ है। और तू हमारे और प्रभु येसु के बीच मध्यस्थ है। प्रभु येसु स्वर्ग के स्वामी हैं। तू उसका द्वार है। हे भाग्यशालिनी ! कृपा के सिंहासन ! तूने सर्वसृष्टिकर्ता को जन्म दिया। जिसे सारा संसार समा न सका उसे तूने अपने गर्भ में समा लिया। समस्त जीव–जन्तुओं के पालनहार का तूने पालन–पोषण किया, इसलिए पीढ़ी दर पीढ़ी तू धन्य है। अपने पावन पुत्र से, तेरे सृष्टिकत्र्ता, तेरे प्राणप्यारे पुत्र से हमारे लिये प्रार्थना कर। हमें यह कृपा दिला कि हम पापी, प्रभु येसु से प्रेम रखें, उसकी सेवा करें और उसका स्वर्ग में दर्शन करें। आमेन।
(स्वास्थ्य की माता की स्तुति विनती : पृष्ठ 58)

सातवाँ दिन
हे दयापूर्ण माता! तेरी शिकायत है कि हम, तेरी पापी संतान, तुझसे यथोचित प्यार नहीं करते। हमारे अपराधों के कारण तेरा बहुत निरादर हुआ। इसका ध्यान आते ही हमारा शरीर कांप उठता है और हमें अत्यधिक पीड़ा होती है।
हे करूणा–सागर ! दयामयी ! हमारे कारण तूने बहुत आँसू बहाये। काश! ये आँसू अग्नि की वर्षा का रूप धारणकर हमारे हृदय में ईश–प्रेम की आग सुलगा दे। हम अपने कठोर  पापों से घृणा करते हैं और प्रतिज्ञा करते हैं कि अब से आगे, असीम भलाई और प्रेममूर्ति ईश्वर का विरोध नहीं करेंगे।
हे पवित्र माता ! हमारी रक्षा कर ! हमारा दीन निवेदन है कि शिकारी को देख उड़ते पक्षी और शेर को देख भागते हुए मृग के समान हम भी प्रलोभनों से दूर भागें और तेरे हृदय में शरण पावें। आमेन।
(स्वास्थ्य की माता की स्तुति विनती : पृष्ठ 58)

 
आठवाँ दिन
हे ईश्वर के मन्दिर ! ज्ञान के पात्र ! तुझे प्रणाम ! तू नियम की अमर मंजूषा के समान ईश्वरीय कृपाओं से भरपूर है। इसलिए तेरा शरीर कब्र में नष्ट नहीं हुआ, किन्तु स्वर्ग में उठा लिया गया। इस कृपा के लिए हम ईश्वर के प्रति कृतज्ञ हैं और तेरी स्तुति करते हैं। हे निर्मल कुँवारी! तूने इस संसार को त्यागकर स्वर्ग प्रवेश किया लेकिन हम परदेशियों को न भूल। हे अमर प्रकाश के तारे ! अन्धकार में भटकने वालों को प्रकाश दिला और इस भवसागर में हमारा मार्गदर्शन कर। पुत्र के सूली के निकट खड़े होकर अपनाये हुए संतानों को न भूल। उसी क्रूसित पुत्र से प्रार्थना कर कि हम अपनी आत्मा और शरीर  को पवित्र रखें और तेरे साथ आनन्द के भागी बनें। आमेन।
(स्वास्थ्य की माता की स्तुति विनती : पृष्ठ 58)

नवाँ दिन
हे प्रभु की सारी कृतियों ! स्वास्थ्य की माता को धन्य कहो, स्वर्ग की रानी की स्तुति करो। हे प्रभु के दूतों ! स्वास्थ्य की माता की प्रशंसा करो। हे परलोक के निवासियों ! स्वर्ग की रानी के गुण गाओ। हे स्वर्ग के सब संतों! स्वास्थ्य की माता का गुणगान करो। हे आकाश के तारागण ! स्वास्थ्य की माता की कीर्ति गाओ। हे वर्षा और ओस ! स्वर्ग की रानी को धन्य कहो। हे अग्नि और ऊष्म ! निष्कलंका की स्तुति करो। हे शरद और धूप ! स्वर्ग की रानी की प्रशंसा करो। हे तुषार और पाले ! स्वास्थ्य की माता के गुण गाओ। हे बफ‍र् और सर्दी! स्वर्ग की रानी का गुणगान करो। हे ओसकणों और हिमपातों ! निष्कलंका का गुणगान करो। हे रात और दिनों! स्वर्ग की रानी की कीर्ति गाओ। हे आलोक और तम ! स्वास्थ्य की माता को धन्य कहो। हे विद्युत और मेघ! स्वर्ग की रानी की स्तुति करो। हे पृथ्वी ! तू अपनी रानी की प्रशंसा कर। हे पर्वतों और पहाडि़यों ! स्वस्थ्य की माता का गुण गाओ। हे सारी पृथ्वी की वनस्पती ! निष्कलंका का गुण गान करो । हे झरनों! स्वास्थ्य की माता का यश–गान करो। हे समुद्रों और नदियों ! निष्कलंका की कीर्ति गाओ। हे मत्स्यों और जलचरों! स्वास्थ्य की माता की स्तुति करो। हे आकाश के सारे पक्षियों ! स्वास्थ्य की माता की स्तुति करो। हे वनचरों ! स्वास्थ्य की माता के गुण गाओ। हे मानवपुत्रों ! स्वास्थ्य की माता के गुणगान करो। हे प्रभु के याजकों व धर्मियों ! स्वास्थ्य की माता का गुणगान करो। हे आत्माओं ! निष्कलंका की कीर्ति गाओ। हे सन्तों और पापियों ! स्वास्थ्य की माता पर आशा रखकर प्रार्थना करो।  आमेन। 

 
स्वास्थ्य की माता की स्तुति विनती
प्रभु दया कर।प्रभु दया कर।
ख्रीस्त दया कर।ख्रीस्त दया कर।
प्रभु दया कर।प्रभु दया कर।
ख्रीस्त हमारी सुन।ख्रीस्त हमारी विनती पूरी कर।
स्वर्गवासी पिता परमेश्वर।हम पर दया कर।
पुत्र परमेश्वर दुनिया के मुक्तिदाता। हम....
पवित्र आत्मा परमेश्वर !
पवित्र त्रित्व एक ही परमेश्वर !
आदि पाप रहित उत्पन्न मरिया
    हे स्वास्थ की माता, हमारे लिए प्रार्थना कर।
विश्व सृष्टि के पूर्व निश्चित, हे स्वास्थ....
आदि में देवदूतों को सूचित, 
आदम को सूचित
पाप–तम को दूर करने वाली प्रकाशपुन्ज
नबियों द्वारा भोर का तारा सूचित
लाभप्रद मेघ स्वरूप
भलाई के पात्र
धर्मपूर्वजों द्वारा प्रशंसित
शैतान का सर कुचलने वाली
राजकुल में श्रेष्ठ वंशज
सन्त योखिम और अन्ना की पुत्री
विशेष प्रसाद स्वरूप जन्मी
दूतों और संतों से अधिक प्रज्जवल
सर्वोत्तम भक्तिमय
ईश्वरीय अनुग्रह से प्रकाशित
ईश–पुत्र से संयुक्त
सब संतों से श्रेष्ठ
जन्म से ही स्वर्गीय प्रकाश से भासित
तेरे जन्म पर स्वर्ग में जय जयकार हुआ
जन्मते ही ईश्वर को अर्पित
अत्यधिकधुरम नाम से सुसज्जित
बाल्यावस्था में ही मंदिर में अर्पित
सर्वश्रेष्ठ कुँवारी
सभी मठवासिनियों का आदर्श
पीडि़तों को धैर्य देने वाली
अपने भक्तों का दृढ़ आसरा
सब सन्तों का सरताज

हे परमेश्वर के मेमने, जो संसार के पाप हर लेता है।
प्रभु, हमें क्षमा कर !
हे परमेश्वर के मेमने, जो संसार के पाप हर लेता है। प्रभु, हमारी प्रार्थना सुन।
हे परमेश्वर के मेमने,जो संसार के पाप हर लेता है। हम पर दया कर।

हम प्रार्थना करें :– हे प्रभु परमेश्वर ! तूने निष्कलंक कुँवारी मरिया को सब कृपाओं से भूषित किया और तेरे पुत्र का पालन–पोषण करने के लिए उसे चुन लिया। हमें यह कृपा दे कि हम उसकी प्रार्थना के द्वारा अकाल, युद्ध और सभी रोगों से मुक्त हों और आनन्द के साथ स्वर्ग सिधार सकें। हमारे प्रभु ख्रीस्त के द्वारा।  आमेन।

वेलांकनी माता से रोगियों की प्रार्थना
हे कुँवारियों की कुँवारी ! स्वास्थ्य की स्वामिनी ! वेलांकनी में विराजमान ईश्वर की माता ! तू मेरी आत्मा और शरीर का सहारा है। तेरी दया और शक्ति पर पूरी आशा रखकर मैं तेरे पास दौड़ आता हूँ। मेरा रोग दूर कर कि मैं तेरे पुत्र  की और तेरी महिमा गाऊँ। सभी रोगियों को ढ़ाढस दिला। यदि उनकी आत्मा के लिये लाभदायक हो तो उन्हें स्वास्थ्य दिला। उनकी अच्छी मृत्यु के लिए सहायता कर। हे कृपामयी माता ! मेरे कष्टों को दूर कर अथवा हे स्वास्थ्य की माता! मुझे वह सहन शक्ति दे कि मैं सभी सांसारिक प्रलोभनों से बचकर अपनी आत्मा को तेरी इच्छानुसार पवित्र रखूँ।
हे दयामयी माता ! तूने किसी भी याचक को इन्कार नहीं किया। यह तो निश्चय है कि मेरे संकट में तू मेरी मदद करेगी। तू ही पीडि़तों की सहानुभूति है। इस निर्वासन में रोते अभागों के आँसू तू ही पोंछ सकती है। तू ही ख्रीस्तीयों की सहायता है। ख्रीस्त की माता होने से तू ही ख्रीस्तीयों के पक्ष में सिफारिश कर सकती है। हे दयामयी और शक्तिमति माता ! हमारी देख–भाल कर कष्ट–पीड़ा से हमारी रक्षा कर। हे स्वामिनी ! प्रार्थना कर कि मैं परमेश्वर के साथ अनंत काल तक आनन्द पानेे के लिए अच्छा ख्रीस्तीय जीवन बिता सकूँ। आमेन।

आत्मा–शरीर की जरूरतों में प्रार्थना
मेरी स्वामिनी ! तू ईश्वर द्वारा दिया गया मेरा सच्चा सहारा है। आतंक के समय विश्राम के शिविर ! पाप के अन्धकार में लड़खड़ाती आत्माओं के प्रकाश ! निर्बलों के बल ! दरिद्रों के धन ! पीडि़तों की आशा ! मानव प्रेमी ! ईश्वर की माता होने के नाते मुझ पर दया कर। तू मुझे भली–भाँती जानती है, इसलिये मैं तुझसे यह विनती करता हूँ।
स्वर्ग और पृथ्वी की रानी ! कृपापूर्ण मरिया ! पापियों की शरण ! पाप–सागर में डूबे लोगों के सहारे ! तेरी सहायता से दास मुक्ति पाते हैं। रोगियों के स्वास्थ्य ! पीडि़तों के सहारे ! संसार–मुक्ति के सिंहासन ! तेरी शरण में आये मुझ पापी को अस्वीकार मत कर, परन्तु मेरी याचना स्वीकार कर। आमेन।

वेलांकनी माता से नौरोजी प्रार्थना
हे अति पवित्र कुँवारी ! पवित्र त्रित्व के द्वारा प्रभु ख्रीस्त की माता बनने चुनी गई निष्कलंका, मैं तेरा सेवक तुझे उस महान आनन्द की याद दिलाता हूँ, जब ईश्वर का पु़त्र तेरे गर्भ में आया। मैं अपनी भक्ति द्वारा तेरे उस आनन्द को और भी बढ़ाना चाहता हूँ। पीडितों के प्रति करूणामय माता ! मेरे पीड़ामय जीवन को आनन्दमय बना। तेरे पुत्र की महान शक्ति पर भरोसा रखकर मैं अपनी अर्जियाँ तेरे सामने रखता हूँ। यदि मेरी ये अर्जियाँ मेरी आत्मा के लिए लाभप्रद हों तो इन्हें मुझे दिला। यदि मेरी मांगें ईश्वरीय इच्छा के प्रतिकूल हों तो मुझे अन्य आवश्यक कृपायें दिला।
(यहां अपनी माँग रखियेगा)

हे ईश्वर की माता तुझपर मेरा भरोसा है, इसलिए मैं यह नौरोजी प्रार्थना कर रहा हूँ। येसु के जन्म के समय जो आनन्द तुझे प्राप्त हुआ, उसकी हम याद करते हैं और उसके सम्मान में यह नौरोजी प्रार्थना करते हैं। तू उसे सुन और मेरे नौ प्रणाम मरिया को भी स्वीकार कर।
( नौ बार ’’प्रणाम मरिया’’ बोलिये )

हे परमेश्वर की पवित्र माँ ! संत गबि््राएल के नम्र प्रणाम के साथ मैं भी तुझे प्रणाम करता हूँ। मेरी यह कामना है कि ये ’’प्रणाम मरिया’’ तेरे मुकुट के तारे बनकर चमकें। हे पीडि़तों के आश्रय ! सभी सन्तों के पुण्य कार्यों के खातिर तू मेरी यह माँग पूरी कर। तेरे और तेरे पुत्र के प्रेम की याद करके मेरी यह अर्जी स्वीकार कर और ईश्वर से यह मुझे प्रदान कर। आमेन।