पुरोहित की प्रार्थना
हे प्रभु, यह मेरे प्रति आपकी करुणा का प्रतीक है कि आपने मुझ निर्बल को आपकी रेवड़ की सेवा हेतु पुरोहिताई की बुलाहट प्रदान की है। इस पावन दान के लिए मैं ज़िन्दगी भर अपने मन-वचन-कर्म से आपका आभारी रहूँगा। हस्तारोपण के द्वारा आपने मुझ पर जिस कृपा की वर्षा की है, उसे मुझमें फलदायक बनाईये। संस्कारों को प्रदान करते समय मैं आप के निगूढ़तम रहस्यों का सेवक बन कर आदर तथा विश्वास के साथ आप की प्रजा को पोषित करने का प्रयत्न कर सकूँ।  आपका वचन मेरे क़दमों के लिए ज्योति बने!  आपकी शक्ति मुझे बल प्रदान करें।  आपका प्यार मुझे स्वर्ग्राज्य के वचन सुनाने के समर्थ बनाये।
हे पिता ईश्वर, शाश्वत पुरोहित येसु के समान मैं अपने जीवन का सम्पूर्ण समर्पण कर सकूँ!  परमप्रसाद में उपस्थित येसु से मेरे लिए तथा आपकी रेवड़ के लिए प्रतिदिन का आहार ग्रहण करनेवाले मेरे हाथों को मलिनता से बचाईये। मेरे होंठों को व्यर्थ की बातों से दूर रखिये। सत्य का कमरबंद कस कर, विश्वास एवं प्रेम का कवच धारण कर तथा मुक्ति का टोप पहनकर आपकी प्रजा का मार्गदर्शन करने हेतु मुझे अपना विवेक एवं प्रज्ञा प्रदान कीजिये। मुझे उस सत्य को ह्रदय से अपनाने की कृपा प्रदान कीजिये कि आपकी कृपा मेरे लिए प्राप्त है क्योंकि मेरी दुर्बलताओं में आपका सामर्थ्य पूर्ण रूप से प्रकट होता है (1कुरि 12 :9)। 
हे भले गड़ेरिये, आपकी रेवड़ की सेवा करते समय मुझे आपकी सुरक्षा का अनुभव दिलाईये। मुझमें अपने पवित्र आत्मा के दान और फल भर दीजिये कि मेरे जीवन-साक्ष्य द्वारा हज़ारों लोग आपके राज्य का निकटतम अनुभव कर पायें।  हे प्रभु, मुझे ऐसा वर दे कि जब मैं इस लोक में अपनी दौड़ पूरी करूँगा, तो परलोक में मुझे विजय-किरीट प्राप्त हो जो आपके विश्वासी भक्तों के लिए आपने तैयार किया है।  हमारे प्रभु ख्रीस्त के द्वारा। आमेन। (-फादर फ्रांसिस स्करिया)