Holy Week Commentary (Hindi)

HOLY WEEK COMMENTARY

(Fr. Marian Miranda OFM.Cap.)

1          दुःखभोग/खजूर रविवार

 

प्रस्तावना: आज से सब से महान व पुण्य सप्ताह आरम्भ होता है । विशेषकर अगला गुरूवार, शुक्रवार, शनिवार तथा रविवार वर्ष-भर में सब से पवित्र दिन हैं । इन दिनों में घटी मानव इतिहास की सब से मुख्य व केन्द्रीय घटना ईश-पुत्र येसु मसीह का दुःखभोग, मरण एवं पुनरूत्थान, माता कलीसिया पुनः हमारे सामने रखती है । हम ख्रीस्तीय न केवल इन घटना‌ओं को ही देखें, परन्तु प्रार्थना तथा निश्चय के साथ पूरी तरह उनमें सक्रिय भाग लें ।

 

आज का दिन प्रभु के दुःखभोग या खजूर रविवार कहा जाता है । आज के दिन जब प्रभु ने येरूसालेम के ओर यात्रा की, तो लोगों ने उसे राजा के रूप में स्वागत किया । बेथानिया से जुलूस में राजा अपने राजाभीषेक एवं गद्दी पर बैटने येरूसालेम आये, परन्तु इस राजा का मुकुट काँटों का मुकुट है और उसकी गद्दी क्रूस है । उसने मनुष्य रूप धारण करने का उद्धेश्य था हमें पाप के बंदनो से छुडाना ।

 

हम अपने उस विजयी राजा के साथ अपने हाथ में आशिष दी ग‌ई खजूर की डालियाँ लेकर जुलूस में निकलते हैं जिन्होंने हमारे लि‌ए एक धमासान लडा‌ई लडी । सचमुच हम आज भी उसी येसु मसीह के जुलुस में जाते हैं जिनके साथ उस पहले खजूर रविवार के दिन यहूदी लोग ग‌ए थे । येसु हमारे बीच तीन प्रकार से उपस्थित हैं - क्रूस पर चिन्ह के रुप में, उनके प्रतिनिधि पुरोहित के रूप में और हम सब के रूप में जो उनके नाम पर यहाँ एकत्रित हु‌ए हैं ।

 

यूखरीस्त हमें कलवारी पहाडी पर हु‌ए मुक्तिकार्य की याद दिलाता व उसे साँस्कारिक चिन्हों के रूप मे उपस्थित करता है, जबकि खजूर के डालियों के साथ जुलूस मुक्तिदाता के पुनरूत्थान का विजय-स्मृति चिन्हं है ।

 

पहला भाग: आज हम येरूसालेम में प्रभु के प्रवेश की स्मृति मनाते हैं: प्रभु येसु पास्का-रहस्य सम्पन्न करने हेतु, येरूसालेम में प्रवेश करते हैं । जुलूस प्रभु का येरूसालेम में समारोही प्रवेश की यादगार में हैं । आ‌ई‌ए हम इन में भक्तीभावना से भाग लें ।

 

2        पुण्य बृहस्पतिवार 2011

 

 

पास्का त्रिदिवस: पास्का त्रिदिवस, पवित्र गुरूवार के दिन प्रभु के अंतिम ब्यालू से आरम्भ होता है । इन दिनों में पास्का घटना, अर्थात प्रभु का क्रूस पर दुःख-भोग, मरण व तीसरे दिन पुनरूत्थान और उस नये जीवन का महोत्सव मनाया जाता है जो क्रूसित, गाडे गये एवं जी उठे ख्रीस्त से निकलता है । इसलि‌ए यह दिन बहुत मधूर एवं सुन्दर दिन है । हमें इन दिनों की प्रार्थना‌ओं में पूरी तरह से भाग लेना है यदि हो सकें तो अपना सब मेहनत का काम भी छोडकर इन रीतियों में समय पर उपस्थित रहकर भाग लेना चाहि‌ए । आ‌ई‌ए हम इन दिनों को भक्ती भावना से रखें और प्रभु में अपना जीवन जोडें ।

 

आज से लेकर पास्का रविवार तक की घटना‌एँ इसा‌ई धर्म, मानव-इतिहास व ईश्वरीय मुक्ति-योजना की केन्द्रिय घटना है । हमा‌ए मानव इतिहास में, ईश्वर के प्यार को स्मरण करने के तीन प्रमुख दिनों में आज पहला दिन है । यह विधी आज प्रभु के अंतिम ब्यालू से आरम्भ होती है । सेवा आज के इस विधी का सन्देश है । धार्मिक एवं मानवता के भाषा में इसे प्यार का दिन कहलाया जाता है । हम ख्रीस्तीयों के लि‌ए प्रभु येसु ने अपना शरीर और रक्त को दिया है । और अपने पुरोहिता‌ई के जिम्मेदारियों को अपने शिष्यों को सौंप दिया हैं । आज के इस पूजन पद्दती में तीन प्रमुख भाग  है । पवित्र परम प्रसाद की स्थापना, पुरोहिता‌ई और प्यार का नमूना, जिसे येसु ने अपने चेलों के पैर धोकर दर्शाया ।

 

अन्तिम भोज का पवित्र मिस्सा: आज हम ख्रीस्त के दो प्रकार के आत्म-बलिदान चढाते हैं: उनके शत्रु‌ओं को और संसार के जीवन हेतु क्रूस पर मर जाने के लि‌ए । वह पास्का बलि है, जिसके रक्त ने अपने लोगों को बचाया । आज की पूरी पूजन-विधी का उद्धेश्य ही यह है कि हम इस बलिदान को अपने जीवन का वास्तविक प्रेरणा स्त्रोत   बना‌एँ । आज का पवित्र मिस्सा एक विशेष महत्व रखता है । आज के इस दिन प्रभु द्वारा परमप्रसाद व पुरोहिता‌ई की स्थापना और पडोसी से प्रेम की आK का दिया जाना समझाया जाता है । वह अपने प्रेरितों के साथ किया प्रभु येसु के अन्तिम भोज या पहले मिस्सा की यादगार है । इस धर्म-विधि में ऐसी कुछ बात है जो हमारे हृदयों को हिला देती है । आज कम से कम हमें अपने पूरे तन मन और हृदय से इस मिस्सा में भाग लेकर प्रभु के कृपापात्र बनने का प्रयास करना है ।

 

आज का मिस्सा दो रंगों से रंगा हु‌आ है । एक तो खुशी का सफेद रंग है जिसमें वेदी की सजावट किया गया है एवं उस पर का क्रूस सफेद कपडे से ढ़का है । पुरोहित भी सफेद वस्त्र पहना हु‌आ है । परमेश्वर का महिमागान का भजन होता है और घंटियाँ भी तपस्या के इन दिनों में पहली व अन्तिम बार बज रही हैं । आज की धर्म विधियाँ हृदय को अतीव गहरा‌ई से छू जाती हैं ।

 

2.1    पहला भाग: ईश-वचन का पठन:

 

पहले पाठ में पास्का भोज के बारे मे सविस्तार रूप से बतलाया गया है । अती शीघ्रता से यह भोजन करने, लोगों को बतलाया है । घरों के चौकटों पर इस पास्का मेमने का रक्त लगाना है जिससे वह सब आनेवाले घोर विपत्ति से बच सकें ।

 

दूसरे पाठ में प्रभु के अंतिम ब्यारी के बारे में बतलाया गया है कि प्रभु ने युखरीस्त को किस प्रकार रूपित किया था ।

 

सुसमाचार में सेवा का श्रेष्टता का वर्णन किया गया है । जिस प्रकार यहूदि पास्का पर्व मिस्त्र की गुलामी से मुक्त होने की यादगारी में मनाते थे, उसी प्रकार हम सभी को यूखरिस्तीय अनुष्टान में भाग लेना है । आ‌ई‌ए हम सभ इस विधि में भक्ती भावना से भाग लें ।

 

2.2   दूसरा भाग: पाद-प्रक्षालन:

 

पडोशी से प्रेम और एकता आज की मुख्य शिक्षा है, और पवित्र परमप्रसाद आज का मुख्य दान है जो प्रभु येसु ने हमें दिया है । कल प्रभु येसु के घोर दुःखभोग व मरण के कारण धर्म-मंडली के दुःख की चरम सीमा का दिन है, इसलि‌ए मिस्सा नहीं है । इसलि‌ए परम प्रसाद को अलग से तैयार की ग‌ई वेदी पर रखा जायेग । वहाँ मध्यरात्री तक हम पारी-पारी से प्रभु येसु को परम प्रसाद के दान के लि‌ए धन्यवाद दें, अपने पापों के लि‌ए पश्चात्ताप करें तथा उनके प्रेम, मानव-एकता एवं सच्ची विश्व शाँति के लि‌ए भी प्रार्थना करें ।

 

पैर धोने केलि‌ए:

 

2.3   विश्वासियों के निवेदन -

 

पु: भा‌ई-बहनो आज हम अंतिम ब्यालू का श्मरण समारोह मना रहें हैं । प्रभु ने बतलाये हु‌ए मार्ग पर चलना बहुत मुश्कील की बात है । प्रभु के इन बातों को हमारे जीवन में लागू करने के लि‌ए हमे चाहि‌ए कि हम प्रभु से ही कृपा एवं प्रेरणा मांगे और हमारे प्रार्थनावों को प्रभु के सामने रखें । आ‌इ‌ए हम अपने जरूरतों को प्रभु के पास रखें । हे पिता हमारी प्रार्थना सुन ।

 

1.         प्रभु के प्रतिनिधि, संत पिता बेनेडिक्ट सोलवे, हमारे महा धर्माध्यक्ष लियो कर्नेलियो, भूत-पूर्व महाधर्माध्यक्ष पास्कल टोप्नो, पुरोहित, धर्मसंघी भा‌ई-बहन और लोक धर्मी बा‌ई बहनों के लि‌ए प्रभु से प्रार्थना करें । ख्रीस्तीय मौल्यों को अपने जीवन में लागु करके  वह एक आदर्शमय ख्रीस्तिय जीवन इस समाज में हमारे लि‌ए प्रस्तुत करे, इस हेतु हम प्रार्थना करें ।

 

2.         जो लोग अपने दैनिक जीवन में अन्याय के कारण विभिन्न प्रकार के कठिना‌इयां सहते हैं, वे धैर्यवान बनें, तथा दुःख और कष्ट देनेवालों केलि‌ए प्रार्थना करें, अपने प्रभु येसु के समान उन्हें प्यार करें और क्षमा करे, इस हेतु हम प्रार्थना करें ।

3.         जो भा‌ई-बहन आज इस वेदी के चारों ओर एकत्र है, वह सेवा और त्याग के कार्यों को करने में हिम्मत न हारे, प्रार्थना में दृढ बने रहे और अपने पडोसी की भला‌ई करने में उदार हो, इस हेतु हम प्राथना करे ।

 

4.         राष्ट्रों के अस्त्र-शस्त्र की दौड रुक जा‌ए, हर प्रकार का मतभेद मित्र-भाव से तय किया जा‌ए, सारी दुनियां में शांति विराजें, विशेष करके पशचिमी राष्ट्रों में । परदेश में काम करनेवाले अपने भा‌ई-बहनों को ईश्वर रक्षा करें । इस हेतु हम प्रार्थना करें ।

 

पु: हे ईश्वर, हमारा निवेदन ग्रहण कर जिसे हम तेरे एकलौते पुत्र येसु ख्रीस्त के पुण्यफलों के द्वारा  तुझे अर्पित करते हैं । ऐसा वर दे कि हम उन्हीं के साथ अनन्त जीवन में प्रवेश पा सकें, उन्हीं हमारे प्रभु ख्रीस्त के द्वारा - आमेन ।

 

मिस्सा के बाद पवित्र आराधना 8.30 बजे से 11.00 तक आराधना

 

08.30   09.00, 09.00   09.30, 09.30   10.00, 10.00   11.00, 11.00   12.00  

 

 

 

3        पुण्य शुक्रवार

 

3.1     प्रस्तावना

 

क्रूस प्यार का संकेत है, हमारे प्यार के कारण प्रभु येसु ने क्रूस को स्वीकार किया और उसे नया अर्थ दिया । यह क्रूस रास्था हमारे मुक्ति का साधन है, हमारे लि‌ए प्रभु के प्यार का संकेत है । आज के इस दिन प्रभु मानवजाती के मुक्ती के लि‌ए मरे, वह हम सबों को नया जीवन दने और हमारे उद्धार करने के लि‌ए मरे । इस क्रूस रास्ता में हम प्रभु कि मृत्यु पर मनन करने जा रहें है, इस क्रूस रास्ता के समय हमारे दैनिक जीवन के सारे कठीना‌इयाँ, समस्या‌एँ और मुसिबतों को प्रभु के चरणो पर अर्पित करें । हमारे जीवन में ऐसे बहुत लोग है जिन्हें हम प्यार नहीं कर पातें है, और जो हमारे जीवन में समस्या खडे करते है, हम उन्हें प्रभु को अर्पित करें और उनके लि‌ए प्रार्थना करें ।  हम अपने वयक्तिक जीवन पर भी मनन करें, क्या मैने इमानदारी के साथ मेरे कर्तव्यों को निभाया है? क्या मैने मेरे जीवन को संपूर्ण रूप से जीने का प्रयास किया है? आ‌इ‌ए भा‌इयों और बहनों हम अपने जीवन पर मनन करते हु‌ए इस क्रूस रास्ता को भक्ति भावना से करें, प्रभु के साथ कल्वारि पहाडी तक चलें । हमारे बेजवाब्दारी जीवनों के लि‌ए प्रभु से क्षमा माँगे और प्रभु के कृपा पात्र बनें ।

 

3.2   क्रूस रास्ता के लि

प्रस्तावना: आज पवित्र शुक्रवार है, प्रभु येसु के घोर दुःखभोग व मरण के कारण धर्म-मंडली के भी दुःख की चरम सीमा का दिन है । इसलि‌ए आज हम सभी सारी कलीसिया के साथ उपवास, परहेज व प्रार्थना में बिता रहे हैं । आज हम भक्तिभावना से प्रभु के क्रूस पर बलिदान का स्मरण कर रहें है । कलवारि पहाड पर मानवजाती को विनाश से बचाने के लि‌ए प्रभु अपने जीवन का बलिदान करतें है । सर्वशक्तिमान ईश्वर मानवजाति के प्यार के लि‌ए असहायक इन्सान बने । मेरे और आप के पाप के कारण उसने असहनीय कष्ट झेले, क्रूस का रास्था स्वीकार किया और वह अपने जीवनदायी वचनों द्वारा हमारे जीवन मे विश्वास एवं साहस को बडाते है । आज हमारे देश में ख्रीस्तीय या ईसा‌ई होने के कारण हमें सताया जा रहा हैं । धर्म के लि‌ए सताया जाना तो हमेशा ईसा‌इयों का सौभाग्य रहा है । संसार के लोग हमें पूरी तरह न कभी समझ पाये हैं, न समझ पायेंगे । इसलि‌ए हमारा आत्म-त्याग आज की धर्म-विधि में विशेष महत्व रखता है । आज के विधी में तीन भाग है, जिनमें मसीह की मृत्यु पुराने व्यवस्थान में चिन्हों द्वारा, नये व्यवस्थान में संत योहन के सुसमाचार से दुःखभोग की कथा में सत्य रूप में और परमप्रसाद की रीति में रहस्यात्मक ढंग से, प्रस्तुत की जाती है । 

 

3.3    पहला भाग शब्द समारोह  

आज के दिन जब हम धर्म-विधी के लि‌ए गिरजा घर में प्रवेश करते हैं तो हम गिरजाघर को खाली, सजावट हीन और पवित्र सन्दूक खुली व खाली पाते हैं - यह सब हमारे आन्तरिक सच्चे दुःख के प्रतीक हैं । मोमबत्तियाँ नहीं है, वेदी पर को‌ई कपडा नहीं है, को‌ई प्रवेश भजन नहीं गाया जाता । पुरोहित लाल कपडे पहने प्रवेश करेंगे तथा वेदी के सामने दण्डवत करते हु‌ए पडे रहेंगे । यह सब मुक्तिकार्य के पूर्व मनुष्य की उजाड एवं उदास दशा को प्रकट करता है । हम नबी इसायस के ग्रंथ से लिया हु‌आ पाठ सुनेंगे, जिस में प्रभु के सेवक के बारे में बतलाया गया है । दूसरा पाठ इब्रानियों के नाम पर लिखा हु‌आ पत्र है जिसमें प्रभु के आKपालन के बारे में सुनेंगे । सुसाचार में सन्त योहन प्रभु येसु के दुःखभोग का वर्णन करते है । आ‌ई‌ए हम इन पाठों को ध्यान पूर्वक सुने और आध्यात्मिक बल पायें ।

 

पहला पाठ - नबी इसायस 52,13-53,12  

दुसरा पाठ - इब्रानियों के नाम पत्र 4,14-16. 5,7-9

संत योहन के अनुसार प्रभु येसु का दुःखभोग १८, १ - १९, ४२

प्रवचन के बाद: हम पूरे कलीसिया के साथ एक हो कर 10 विशेष निवेदनों को प्रभु के सामने रखते है, हम प्रभु से प्रार्थना करें कि वह हमारे प्रार्थनावों को स्वीकार करें ।

 

3.4   विश्वासियों के निवेदन: महा प्रार्थनाएँ

1. पवित्र कलीसिया के लि‌ए:  प्रिय भा‌ई-बहनों, हम पवित्र कलीसिया के लि‌ए प्रार्थना करें, प्रभु ईश्वर सारे जगत में उसे शांति और एकता प्रदान करे तथा सुरक्षित रखें । और हम चैन तथा शांति में जीवन बिताते हु‌ए सर्वशक्तिमान पिता ईश्वर की महिमा कर सकें । हम थोडा समय मौन रहकर प्रार्थना करें । पुरोहित: .............

 

2. संत पिता के लि‌ए: प्रिय भा‌ई-बहनों, हम अपने संत पिता बेनेडिक्ट सोलवे के लि‌ए प्रार्थना करें, प्रभु ईश्वर ने उन्हें धर्माध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया है; वह उनको अपनी कलीसिया के कल्याण के लि‌ए स्वस्थ और सुरक्षित रखे कि वे ईश्वर की पवित्र प्रजा पर शासन कर सकें । पुरोहित: .............

 

3. याजक-वर्ग तथा अन्य विश्वासियों के लि‌ए: प्रिय भा‌ई-बहनों, हम अपने महाधर्माध्यक्ष लियो कर्नेलियो, भुतपूर्व महाधर्माध्यक्ष पास्कल टोप्नो, अन्य सभी धर्माध्यक्षों, पुरोहितों, उपयाजकों तथा कलीसिया की सब श्रेणियों और विश्वासियों की सारी मंडली के लि‌ए प्रार्थना करें । पुरोहित: .............

4. विश्व भर के सभी दीक्षार्थियों के लि‌ए: प्रिय भा‌ई-बहनों, प्रभु ईश्वर की असीम दया से सभी दीक्षार्थि उसका वचन अपने हृदय में ग्रहण करें, बपतिस्मा में नया जन्म लेकर अपने पापों की क्षमा पा‌एं और हमारे प्रभु येसु ख्रीस्त के अंग बन जा‌एं । पुरोहित: ........ .

 

५. ख्रीस्तीय एकता के लि‌ए: प्रिय भा‌ई-बहनों, ख्रीस्त में विश्वास करने वाले सभी भा‌ई-बहनों के लि‌ए हम प्रार्थना करे । वे सत्य के मार्ग पर बढते जा‌एं, और प्रभु ईश्वर उन्हें अपनी एकमात्र कलीसिया में एकत्र कर सुरक्षित रखें । पुरोहित: .............

 

6. यहूदी जाति के लि‌ए: प्रिय भा‌ई-बहनों, प्रभु ईश्वर की वाणी सब से पहले उन्हीं को प्राप्त हु‌ई थी । उसकी कृपा से वे ईश्वर को अधिकाधीक प्यार करें और उसके व्यवस्थान के प्रति अधिक विश्वस्त बनते जा‌एं । पुरोहित: .............