प्रभु येसु का दुखभोग (Passion Reading)
Passion Reading in Hindi प्रभु येसु का दुखभोग (योहन 18:1 – 19:42) C: Commentator J: Jesus CR: Crowd M: Man W: Woman C सन्त योहन के अनुसार प्रभु येसु का दुखभोग। येसु अपने शिष्यों के साथ केद्रोन नाले के उस पार गये। वहाँ एक बारी थी। उन्होंने अपने शिष्यों के साथ उस में प्रवेश किया। उनके विश्वासघाती यूदस को भी वह जगह मालूम थी, क्योंकि येसु अक्सर अपने शिष्यों के साथ वहाँ गये थे। इसलिये यूदस पलटन और महायाजकों तथा फ़रीसियों के भेजे हुये प्यादों के साथ वहाँ आ पहुँचा। वे लोग लालटेनें मशालें और हथियार लिये थे। येसु, यह जान कर कि मुझ पर क्या- क्या बीतेगी आगे बढे और उन से बोले, J ''किसे ढूढतें हो?'' C उन्होंने उत्तर दिया, CR ''येसु नाजरी को''। C येसु ने उन से कहा, J ''मैं वही हूँ''। C वहाँ उनका विश्वासघाती यूदस भी उन लोगों के साथ खडा था। जब येसु ने उन से कहा, 'मैं वही हूँ' तो वे पीछे हटकर भूमि पर गिर पडे। येसु ने उन से फ़िर पूछा J ''किसे ढूढते हो?'' C वे बोले, CR ''येसु नाजरी को''। C इस पर येसु ने कहा, J 'मैं तुम लोगों से कह चुका हूँ कि मैं वही हुँ। यदि तुम मुझे ढूँढ़ते हो तो इन्हें जाने दो।'' C यह इसलिये हुआ कि उनका यह कथन पूरा हो जाये- तूने मुझ को जिन्हें सौंपा, मैंने उन में से एक का भी सर्वनाश नहीं होने दिया। उस समय सिमोन पेत्रुस ने अपनी तलवार खींच ली और प्रधानयाजक के नौकर पर चलाकर उसका दाहिना कान उडा दिया। उस नौकर का नाम मलखुस था। येसु ने पेत्रुस से कहा, J ''तलवार म्यान में कर लो। जो प्याला पिता ने मुझे दिया है क्या मैं उसे नहीं पिऊँ?'' C तब पलटन, कप्तान और यहूदियों के प्यादों ने येसु को पकड कर बाँध लिया। वे उन्हें पहले अन्नस के यहाँ ले गये; क्योंकि वह उस वर्ष के प्रधानयाजक कैफस का ससुर था। यह वही कैफस था जिसने यहूदियों को यह परामर्श दिया था- अच्छा यही है कि राष्ट्र के लिये एक ही मनुष्य मरे। सिमोन पेत्रुस और एक दूसरा शिष्य येसु के पीछे-पीछे चले। यह शिष्य प्रधानयाजक का परिचित था और येसु के साथ प्रधानयाजक के प्रांगण में गया, किन्तु पेत्रुस फाटक के पास बाहर खडा रहा। इसलिये वह दूसरा शिष्य जो प्रधानयाजक का परिचित था, फ़िर बाहर गया और द्वारपाली से कहकर पेत्रुस को भीतर ले आया। द्वारपाली ने पेत्रुस से कहा, W ''कहीं तुम भी तो उस मनुष्य के शिष्य नहीं हो?'' C उसने उत्तर दिया, M ''नहीं हूँ। C जाड़े के कारण नौकर और प्यादे आग सुलगा कर ताप रहे थे। पेत्रुस भी उनके साथ आग तापता रहा। प्रधानयाजक ने येसु से उनके शिष्यों और उनकी शिक्षा के विषय में पूछा। येसु ने उत्तर दिया, J ''मैं संसार के सामने प्रकट रूप से बोला हूँ। मैंने सदा सभागृह और मन्दिर में जहाँ सब यहूदी एकत्र हुआ करते हैं, शिक्षा दी है। मैंने गुप्त रूप से कुछ नहीं कहा। यह आप मुझ से क्यों पूछते हैं? उन से पूछिये जिन्होंने मेरी शिक्षा सुनी है। वे जानते हैं कि मैंने क्या-क्या कहा।'' C इस पर पास खडे प्यादों में से एक ने येसु को थप्पड मार कर कहा, M ''तुम प्रधानयाजक को इस तरह जवाब देते हो?'' C येसु ने उस से कहा, J ''यदि मैंने गलत कहा, तो गलती बता दो और यदि ठीक कहा तो, मुझे क्यों मारते हो?'' C इसके बाद अन्नस ने बाँधें हुये येसु को प्रधानयाजक कैफस के पास भेजा। सिमोन पेत्रुस उस समय आग ताप रहा था। कुछ लोगों ने उस से कहा, CR ''कहीं तुम भी तो उसके शिष्य नहीं हो?'' C उसने अस्वीकार करते हुये कहा M ''नहीं हूँ''। C प्रधानयाजक का एक नौकर उस व्यक्ति का सम्बन्धी था जिसका कान पेत्रुस ने उडा दिया था। उसने कहा M ''क्या मैंने तुम को उसके साथ बारी में नहीं देखा था? C पेत्रुस ने फिर अस्वीकार किया और उसी क्षण मुर्गे ने बाँग दी। तब वे येसु को कैफस के यहाँ से राज्य पाल के भवन ले गये। अब भोर हो गया था। वे भवन के अन्दर इसलिये नहीं गये कि अशुद्ध न हो जायें, बल्कि पास्का का मेमना खा सकें। पिलातुस बाहर आकर उन से मिला और बोला, M ''आप लोग इस मनुष्य पर कौन सा अभियोग लगाते हैं?'' C उन्होने उत्तर दिया, CR ''यदि यह कुकर्मी नहीं होता, तो हमने इसे आपके हवाले नहीं किया होता''। C पिलातुस ने उन से कहा, M ''आप लोग इसे ले जाइए और अपनी संहिता के अनुसार इसका न्याय कीजिये।'' C यहूदियों ने उत्तर दिया, CR ''हमें किसी को प्राणदंण्ड देने का अधिकार नहीं है''। C यह इसलिये हुआ कि येसु का वह कथन पूरा हो जाये, जिसके द्वारा उन्होने संकेत किया था कि उनकी मृत्यु किस प्रकार की होगी। तब पिलातुस ने फिर भवन में जा कर येसु को बुला भेजा और उन से कहा, M ''क्या तुम यहूदियों के राजा हो?'' C येसु ने उत्तर दिया J ''क्या आप यह अपनी ओर से कहते हैं या दूसरों ने आप से मेरे विषय में यह कहा है?'' C पिलातुस ने कहा, M ''क्या मैं यहूदी हूँ? तुम्हारे ही लोगों और महायाजकों ने तुम्हें मेरे हवाले किया। तुमने क्या किया है।'' C येसु ने उत्तर दिया J ''मेरा राज्य इस संसार का नहीं है। यदि मेरा राज्य इस संसार का होता तो मेरे अनुयायी लडते और मैं यहूदियों के हवाले नहीं किया जाता। परन्तु मेरा राज्य यहाँ का नहीं है।'' C इस पर पिलातुस ने उन से कहा, M ''तो तुम राजा हो?'' C येसु ने उत्तर दिया, J ''आप ठीक ही कहते हैं। मैं राजा हुँ। मैं इसलिये जन्मा और इसलिये संसार में आया हूँ कि सत्य के विषय में साक्ष्य पेश कर सकूँ। जो सत्य के पक्ष में है, वह मेरी सुनता है।'' C पिलातुस ने उन से कहा, M ''सत्य क्या है?'' C वह यह कहकर फिर बाहर गया और यहूदियों के पास आ कर बोला M ''मैं तो उस में कोई दोष नहीं पाता हूँ, लेकिन तुम्हारे लिये पास्का के अवसर पर एक बन्दी को रिहा करने का रिवाज है। क्या तुम लोग चाहते हो कि मैं तुम्हारे लिये यहूदियों के राजा को रिहा कर दूँ?'' C इस पर वे चिल्ला उठे, CR ''इसे नहीं, बराब्बस को''। C बराब्बस डाकू था। तब पिलातुस ने येसु को ले जा कर कोडे लगाने का आदेश दिया। सैनिकों ने काँटों का मुकुट गूँथ कर उनके सिर पर रख दिया और उन्हें बैंगनी कपडा पहनाया। फिर वे उनके पास आ-आ कर कहते थे CR ''यहूदियों के राजा प्रणाम!'' C और वे उन्हें थप्पड मारते जाते थे। पिलातुस ने फिर बाहर जा कर लोगों से कहा M ''देखो मैं उसे तुम लोगों के सामने बाहर ले आता हूँ, जिससे तुम यह जान लो कि मैं उस में कोई दोष नहीं पाता''। C तब येसु काँटों का मुकुट और बैगनी कपडा पहने बाहर आये। पिलातुस ने लोगों से कहा M ''यही है वह मनुष्य!'' C महायाजक और प्यादे उन्हें देखते ही चिल्ला उठे CR ''इसे क्रूस दीजिये! इसे क्रूस दीजिये!'' C पिलातुस ने उन से कहा, M ''इसे तुम्हीं ले जाओ और क्रूस पर चढाओ। मैं तो इस में कोई दोष नहीं पाता।'' C यहूदियों ने उत्तर दिया, CR ''हमारी एक संहिता है और उस संहिता के अनुसार यह प्राणदंण्ड के योग्य है, क्योंकि इसने ईश्वर का पुत्र होने का दावा किया है।'' C पिलातुस यह सुनकर और भी डर गया। उसने फिर भवन के अन्दर जा कर येसु से पूछा, M ''तुम कहाँ के हो?'' C किन्तु येसु ने उसे उत्तर नहीं दिया। इस पर पिलातुस ने उन से कहा, M ''तुम मुझ से क्यों नहीं बोलते? क्या तुम यह नहीं जानते कि मुझे तुम को रिहा करने का भी अधिकार है और तुम को क्रूस पर चढ़वाने का भी? C येसु ने उत्तर दिया, J ''यदि आप को ऊपर से अधिकार न दिया गया होता तो आपका मुझ पर कोई अधिकार नहीं होता। इसलिये जिसने मुझे आपके हवाले किया, वह अधिक दोषी है।'' C इसके बाद पिलातुस येसु को मुक्त करने का उपाय ढूँढ़ता रहा, परन्तु यहूदी यह कहते हुये चिल्लाते रहे, CR ''यदि आप इसे रिहा करते हैं, तो आप कैसर के हितेषी नहीं हैं। जो अपने को राजा कहता है वह कैसर का विरोध करता है।'' C यह सुनकर पिलातुस ने येसु को बाहर ले आने का आदेश दिया। वह अपने न्यायासन पर उस जगह, जो लिथोस-त्रोतोस, और इब्रानी में गबूबथा, कहलाती है, बैठ गया। पास्का की तैयारी का दिन था। लगभग दोपहर का समय था। पिलातुस ने यहूदियों से कहा, M ''यही ही तुम्हारा राजा!'' C इस पर वे चिल्ला उठे, CR ''ले जाइये! ले जाइए! इसे क्रूस दीजिये!'' C पिलातुस ने उन से कहा M “क्या, 'मैं तुम्हारे राजा को क्रूस पर चढवा दूँ?'' C महायाजकों ने उत्तर दिया, CR ''कैसर के सिवा हमारा कोई राजा नहीं''। C तब पिलातुस ने येसु को कू्रस पर चढाने के लिये उनके हवाले कर दिया। वे येसु को ले गये और वह अपना कू्रस ढोते हुये खोपडी की जगह नामक स्थान गये। इब्रानी में उसका नाम गोलगोथा है। वहाँ उन्होंने येसु को और उनके साथ और दो व्यक्तियों को क्रूस पर चढाया- एक को इस ओर, दूसरे को उस ओर और बीच में येसु को। पिलातुस ने एक दोषपत्र भी लिखवा कर कु्रस पर लगवा दिया। वह इस प्रकार था- ''येसु नाजरी यहूदियों का राजा।'' बहुत-से यहूदियों ने यह दोषपत्र पढा क्योंकि वह स्थान जहाँ येसु कू्रस पर चढाये गय थे, शहर के पास ही था और दोष पत्र इब्रानी, लातीनी और यूनानी भाषा में लिखा हुआ था। इसलिये यहूदियों के महायाजकों ने पिलातुस से कहा, CR ''आप यह नहीं लिखिये- यहूदियों का राजा; बल्कि- इसने कहा कि मैं यहूदियों का राजा हूँ''। C पिलातुस ने उत्तर दिया, M ''मैंने जो लिख दिया, सो लिख दिया।'' C येसु को कू्रस पर चढाने के बाद सैनिकों न उनके कपडे ले लिये और कुरते के सिवा उन कपडों के चार भाग कर दिये- हर सैनिक के लिये एक-एक भाग। उस कुरते में सीवन नहीं था, वह ऊपर से नीचे तक पूरा-का-पूरा बुना हुआ था। उन्होंने आपस में कहा, CR ''हम इसे नहीं फाडें। चिट्ठी डालकर देख लें कि यह किसे मिलता है। C यह इसलिये हुआ कि धर्मग्रंथ का यह कथन पूरा हो जाये- उन्होंने मेरे कपडे आपस में बाऊट लिये और मेरे वस्त्र पर चिट्ठी डाली। सैनिकों ने ऐसा ही किया। येसु की माता, उसकी बहिन, क्लोपस की पत्नि मरियम और मरियम मगदलेना उनके कू्रस के पास खडी थीं। येसु ने अपनी माता को और उनके पास अपने उस शिष्य को, जिसे वह प्यार करते थे देखा। उन्होंने अपनी माता से कहा, J ''भद्रे! यह आपका पुत्र है''। C इसके बाद उन्होंने उस शिष्य से कहा, J ''यह तुम्हारी माता है''। C उस समय से उस शिष्य ने उसे अपने यहाँ आश्रय दिया। तब येसु ने यह जान कर कि अब सब कुछ पूरा हो चुका है, धर्मग्रन्थ का लेख पूरा करने के उद्देश्य से कहा, J ''मैं प्यासा हूँ''। C वहाँ खट्ठी अंगूरी से भरा एक पात्र रखा हुआ था। लोगों ने उस में एक पनसोख्ता डुबाया और उसे जूफ़े की डण्डी पर रख कर येसु के मुख से लगा दिया। येसु ने खट्ठी अंगूरी चखकर कहा, J ''सब पूरा हो चुका है''। C और सिर झुकाकर प्राण त्याग दिये। ....... (सभी लोग घुटने टेकें) ........ वह तैयारी का दिन था। यहूदी यह नहीं चाहते थे कि शव विश्राम के दिन कू्रस पर रह जाये क्योंकि उस विश्राम के दिन बड़ा त्यौहार पडता था। उन्होंने पिलातुस से निवेदन किया कि उनकी टाँगें तोड दी जाये और शव हटा दिये जायें। इसलिये सैनिकों ने आकर येसु के साथ क्रूस पर चढाये हुये पहले व्यक्ति की टाँगें तोड दी, फिर दूसरे की। जब उन्होंने येसु के पास आकर देखा कि वह मर चुके हैं तो उन्होंने उनकी टाँगें नहीं तोडी; लेकिन एक सैनिक ने उनकी बगल में भाला मारा और उस में से तुरन्त रक्त और जल बह निकला। जिसने यह देखा है, वही इसका साक्ष्य देता है, और उसका साक्ष्य सच्चा है। वह जानता है कि वह सच बोलता है, जिससे आप लोग भी विश्वास करें। यह इसलिये हुआ कि धर्मग्रंथ का यह कथन पूरा हो जाये- उसकी एक भी हड्डी नहीं तोडी जायेगी; फिर धर्मग्रन्थ का एक दूसरा कथन इस प्रकार है- उन्होंने जिसे छेदा, वे उसी की ओर देखेगें। इसके बाद अरिमथिया के यूसुफ ने जो यहूदियों के भय के कारण येसु का गुप्त शिष्य था, पिलातुस से येसु का शब ले जाने की अनुमति माँगी। पिलातुस ने अनुमति दे दी। इसलिये यूसुफ आ कर येसु का शव ले गया। निकोदेमुस भी पहूँचा, जो पहले रात को येसु से मिलने आया था। वह लगभग पचास सेर का गंधरस और अगरू का सम्मिश्रण लाया। उन्होंने दफन की प्रथा के अनुसार उसे सुगंधित द्रव्यों के साथ छालटी की पट्टियों में लपेटा। जहाँ येसु कू्रस पर चढाये गये थे, वहाँ एक बारी थी और उस बारी में एक नयी कब्र, जिस में अब तक कोई नहीं रखा गया था। उन्होंने येसु को वहीं रख दिया, क्योंकि वह यहूदियों के लिये तेयारी का दिन था और वह कब्र निकट ही थी। ................... यह प्रभु का सुसमाचार है।