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Sunday Homilies - November 18, 2012
वर्ष का तैंतीसवाँ इतवार
By फादर थॉमस फिलिप
दानिएल 12:1-3; इब्रानियों 10:11-14,18; मारकुस 13:24-32

आज के सुसमाचार द्वारा प्रभु येसु हमें बताते हैं, ’’आकाश और पृथ्वी टल जायें, परन्तु मेरे शब्द नहीं टल सकते’’  हमारे दैनिक जीवन का अनुभव यह है कि सब कुछ बदलते रहता है या नया बनता जाता है।  उम्र, साल, मौसम, व्यक्ति आदि चीज़ों को देखने से पता चलता है कि कुछ भी स्थिर नहीं है।

            कलीसिया के जीवन में, नवंबर का महीना एक ऐसा महीना है जब हम सभी संतों और सभी मृतकों की याद करते हैं।  साथ ही साथ हम पूजन पद्धतिकाल का भी अंत करते हुए एक नये पूजन पद्धतिकाल को शुरू करने के लिए अपने आप को तैयार करते हैं।  अगले रविवार को हम राजराजेश्वर प्रभु ख्रीस्त का त्योहार मनायेंगे जिसके शब्द कभी टल नहीं सकते। 

            ’’ईसा मसीह एकरूप रहते हैं- कल, आज और अनन्त काल तक’’ (इब्रानियों 13:8)  वही ’’जो है, जो था और जो आनेवाला है, वही सर्वशक्तिमान् प्रभु ईश्वर कहता है - आल्फा और ओमेगा (आदि और अन्त) मैं हूँ!’’ (प्रकाशना 1:8)

            आज के सुसमाचार द्वारा प्रभु येसु दो घटनाओं की भविष्यवाणी या घोषणा करते हैं- दुनिया का अंत और उनका दूसरा आगमन। 

            ’’उन दिनों सूर्य अंधकारमय हो जायेगा, चन्द्रमा प्रकाश नहीं देगा, तारे आकाश से गिर जायेंगे और आकाश की शक्तियाँ विचलित हो जायेगी।  प्रभु के कथन को हमें अक्षरषः नहीं बल्कि प्रतीकात्मक रूप से समझना चाहिए।  दुनिया के अंत को हमें कायापलट के रूप में देखना चाहिए।  सूर्य का अंधकारमय होना, तारे का गिर जाना आदि नबी इसायाह के ग्रंथ अध्याय 13:10 और 34:4 से जुड़े हैं जहाँ प्रभु इस्राएल और उनके विरोधियों को मिलने वाली सज़ा के बारे में बताते हैं।  कहने का तात्पर्य यह है कि दुनिया के अंत ’’परिवर्तन के समय है’’  हमें बहुत चिन्ह देखने के लिए मिलेंगे।  वे चिन्ह हमें प्रभु की ओर लौटने के लिए मदद करते हैं।  ये सब हमें यह बताते हैं कि प्रभु आने वाले हैं।

            लेकिन प्रभु के दूसरे आगमन के बारे में येसु खुद कहते हैं, ’’उस दिन और घड़ी के विषय में कोई नहीं जानता- न तो स्वर्ग के दूत और न पुत्र’’ (मारकुस 13:32) इसका मतलब यह नहीं है कि पुत्र येसु ईश्वर नहीं हैं।  उन के कहने का तात्पर्य यह होगा कि यह जानना हमारे लिए अनिवार्य नहीं है कि दुनिया का अन्त कब होगा।  और हमें यह भी याद रखना चाहिए कि ईश्वर के लिए समय उसी तरह नहीं है जिस तरह हम समय को साल, महीने, सप्ताह, दिन या बीते हुए वर्ष या आने वाले साल आदि के रूप में समझते, जानते व बोलते है।  यह सब प्रभु के लिए नहीं हैं।  प्रभु के लिए सब कुछ ’’अभी’’ है।  इसलिये कहा जाता है कि ईश्वर ’’अनन्त अब’’ में रहते हैं।  इसलिये उन्होंने समय को बताना भी नहीं चाहा।  इसलिये आज इस संसार के लोग इस दुनिया के अंत के बारे में जो भविष्यवाणी करते हैं वे झूठी हैं। 

            आज का दूसरा पाठ हमें याद दिलाता है कि हमें किस तरह प्रभु के दूसरे आगमन का इंतजार करना है।  दूसरे पाठ में हमें उस पवित्र बलिदान के बारे में बताया जाता है जिसे प्रभु येसु ने हमारे लिए चढ़ाया है जिस में उन्होंने अपने आप को कुर्बान कर दिया।  उस दिव्य बलिदान में आज भी हम ख्रीस्तीय भाई-बहन भाग लेते हैं।  प्रभु येसु का त्याग या बलिदान मानवों के लिए, उनके दूसरे आगमन तक उनकी यादगारी में और उनके उस महान मुक्ति विधान का स्मरण दिलाता रहता है ताकि हम हमेशा उनके साथ और पिता परमेश्वर की संगति में रहें।  इस तरह प्रभु की संगति में रहने वालों को दुनिया के अंत के बारे में सोचने, मृत्यु के बारे में सोचने, उससे डरने या भयभीत होने की ज़रूरत नहीं है।

            प्रभु के दूसरे आगमन के विषय में जो बातें बतायी गयी हैं वे हमें विश्वास, भरोसे और आनन्द के साथ इस दुनिया में अपना जीवन बिताने का संदेश देती है क्योंकि प्रभु के आगमन पर हम उनको आमने-सामने देखेंगे और अनन्त जीवन में प्रवेश भी करेंगे।  हम जहाँ से आये हैं, वहाँ पुनः अपने वास्तविक निवास में हमेशा के लिए पहुँच जायेंगे।  इसलिए हमें आध्यात्मिक जीवन में अपने आप को सुधारते हुए, प्रभु के मार्ग पर चलते हुए कलीसिया में दिये जाने वाले संस्कारों को ग्रहण करते हुए, उनका इंतजार करना चाहिए।

आइए हम उसी मुक्तिदाता प्रभु के आगमन की निरंतर तैयारी में अपना जीवन जीते रहें।  

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