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Sunday Homilies - July 13, 2014
वर्ष का 15वाँ इतवार
By फ़ादर मरियन मिरांडा (OFM Cap)

भारत देश के अजादी पर ब्रिटिष लोगों को भारत देश छोडकर जाना पडा, उस समय जब वे अपने देश जाने वाले थे, उन्होंने अपने भव्य बंगले और किमती वाली चिजें अपने नौकरों में बांटने सोचा । बहुत साल से रसोई घर में काम करने वाले एक को उसके मालिक ने एक बैबल तोहफे के रूप में दिया और कहा: यह तो बहुत किमतीवाली चीज है, जब आप के जीवन में कष्ट आयेंगे तो इसे खोल कर देखना । वह व्यक्ती बहुत उदास एवं दुःखी होगया, उसने मन-ही-मन सोचा, इतना साल ईमानदारी की सेवा देने का पुरस्कार एक बैबल मात्र? इस से क्या भलाई हो सकती है? वह इतना उदास हुआ की उसने उस बैबल को उठाकर अल्मारिके एक कोने मे पटका दिया । बहुत साल के बाद उसके जीवन में बहुत कष्ट आये, वह कंगाल हो गया, उसे समज में नहीं आया की वह क्या करें, तब बैबल दे कर कहे हुए उन बातों की उसे याद आयी, जीवन में कष्ट आने पर इस बैबल को खोलना । उसने उस बैबल को निकाला और खोला और वह विश्वास नहीं कर सका, उस बैबल में एक बेंक बुक और एक पास बुक था, उसके मालिक ने अपनी जायदाद उस नौकर के नाम पर बेंक में डाली थी । बैबल क्या दे सकता है करके सोचनेवाले उसको बैबल उसके जीवन की रोशनी बन गई ।

पवित्र बैबल, ईश वचन की शक्ती और अधीकार के बारे में बतलाता है । जब हम इस ईस वचन को पढते व सुनते हैं दैविक शक्ती हमारे जीवन में प्रवेश करती है । जो हमारे जीवन में परिवर्तन लाती है । "हमारे हृदय कितने उद्दीप्त हो रहे थे, जब वे रास्ते में हम से बातें कर रहे थे और हमारे लिए घर्मग्रन्थ की व्याख्या कर रहे थे" (लूक 24, 32) । अकसर हम प्रभु के वचन को सुनते हैं परन्तु उस पर मनन नहीं करते हैं, उसे सुनकर मनन करते हैं परन्तु तुरन्त भूल जाते हैं, उसे सुनकर मनन करते हैं परन्तु हम उसके अनुसार नहीं जीते है और बहुत कम उसे सुनकर, उस पर मनन करके, उसे अपने जीवन को लागू करते हैं ।

इस समाज में अपना जीवन यांत्रिक जीवन जैसे हुआ है, संसार जैसे कहता है वैसे हम करते है, और जो मैं सोच रहा हुँ वही सही है । इस प्रकार के जीवन में प्रभु को जगह नहीं है, प्रभु के वचन सुनना मैं पसंद नहीं करता । इसे फादर्स और सिस्टर्स सुनने दो, उनको और क्या काम है? ईश वचन का यह पुस्तक हमारे घरों में है, परन्तु उस पर धूल जम रही है, न तो हम उसे पडते हैं और न अपने बच्चों को पडते कहते हैं । परन्तु मोबाईल रेडियों में गाने बजते रहना हम पसंद करते हैं और वह मोबाइल हमारे गले मे टंगा रहता है ।

प्रभु को पुरोहितों, फरीसियों और शास्त्रीयों ने विरोध किया था और प्रार्थना सभा (सिनागोग) में प्रवचन देने मना किया था । इसलिए प्रभु के शिष्य निराश, उदास एवं हताश थे । इस समय उनका आत्मविश्वास बडाने के लिए प्रभु ने यह सामती उनके सामने रखी । प्रार्थना सभा में जगह न मिलने के कारण प्रभु ने समुद्र के किनारे और पर्वत के ढाल पर लोगों को स्वर्गराज्य की शिक्षा देने लगे । एक तरफ फरीसी प्रभु को पकडने के ताक में थे, दूसरी ओर आम जनता प्रभु की शिक्षा सुनने के बदले, प्रभु से चंगाई प्रदान करने का सामर्थ्य और अधिकार देखना चाहते थे । प्रभु ने अपने भयभीत शिष्यों को आश्वासन दिया की, तीर्व विरोध रहने के बाऊजूद भी और हम योग्य या अयोग्य रहने के बाऊजूद भी ईश्वर फल उत्पन्न करनेवाले बीज को हमारे जीवन में बोते रहते हैं जो हमारे जीवन मे फल देना सुरू करता है । कलीसिया प्रभु के प्यार के बीज को दूर जंगलों में रहने वाले अपने बच्चों को, शहर में ज्यादा समय बितलाने वाले युवक-युवतियों को, और समाज के सारे प्रकार के लोगों को, भरोसे के साथ प्रभु के इस सन्देश को प्रभु के ही कृपा और शक्ती पर निर्भर रहकर सुनाने आग्रह करती है । ईश्वर का यह वचन तेज तल्वार के समान (Is 49:2), दुधारी तल्वार के समान (Heb 4: 12), और भारी हथोडी के समान (Jer 23: 29) कार्य निभाता है । और दुनिया में ऐसी कोई ताकत नहीं है जो इस वचन को अपने प्रभाव से निरस्त करके रोख सके ।

चार प्रकार की धरती और वास्तव में हम सबों में यह चार प्रकार की प्रतीक्रिया होती रहती है । रास्ते के किनारे गिरे बीज: रास्ते की ज़मीन बहुत खडक जमीन होती है वहाँ पानी जमीन मे सींचता भी नही । इसलिए यहाँ पर गिरनेवाला बीज पक्षीयों के लिए भोजन और टहलने वाले उसे रोंदते हैं । इस प्रकार का स्वभाव उस व्यक्ती का होता है जो ईश वचन सुनता है परन्तु उसे अपने जीवन में लागू होने नहीं देता । तुरन्त वह इस वचन को भूल कर दुनियाँदारी बातों में लीप्त हो जाता है । इस प्रकार के लोग कठीन हृदय, आलसीपन, गलत फहमी, डर, अहंकार और अविश्वासीय जीवन बितलाने वाले होते हैं ।

पथरीली भूमी पर गिरे बीज: इस प्रकार की भूमी उन लोगों को दर्शाता है जो इमोशनल होकर हमेशा नये बातों (look for novelties) के ओर देखते रहते हैं परन्तु इन्हें करने नहीं है । इस प्रकार के लोग वे होतें है जो प्रभु के बातों से तुरन्त प्रभावीत हो जाते हैं परन्तु बहुत जल्द अपनी आसक्ती खो देते हैं क्योंकी वह प्रभु के वचन को अपने जीवन में जीवंत रखने में प्रयास नहीं करते हैं । जब प्रभु ने कहा की मै जीवन की रोटी हुँ, उनके लिए वह शिक्षा बहुत कठीन थी और वे चले जाते हैं ।

काँटों और जंगली घास में गिरे बीज: इस प्रकार की ज़मीन उन लोगों को दर्शाता है जो गलत रास्ते पर चलते हैं और बुरे आदतों के शिकार है, जिनका हृदय तिरस्कार और प्रतीकार, जलन और लालच के भावनाओं से चका चक भरा हुआ है । उनका एक ही मकसद है कोई भी तरीखे से धन कमाकर जीवन में मौज करना । प्रभु कहते हैं की सांसारिक बातों मे उनका जीवन इतना भर गया है की उनको दूसरा रास्ता नहीं दिखता है । जैसे जूडस ने किया, लंबा समय तक प्रभु के साथ रहने के बाद अपने जीवन में से सांसारिक बातों को वह हटा नहीं सके । और उसने प्रभु को चांदि के सिककों के लिए भेज दिया ।

अच्छी भूमि पर गिरे बीज: यह ज़मीन उन लोगों को दर्शाता है जो प्रभु के वचन को पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन से पवित्रता व विनमृता पूर्वक सुनने के लिए ललायित रहते हैं । सौभाग्यशाली से बैबल में ऐसे बहुत लोग है जिनका जीवन बहुत समस्यायें एवं रूकावटें रहते के बाऊजूद भी प्रभु के सन्देश से रूपांतरीत हुआ है । और उन लोगों ने फल उत्पन्न किया है 30%, 60% और 100%

यह हमारे अंतरात्मा के लिए एक चुनैती । क्या मैं केवल ईश वचन को सुनता हुँ या उसे समजनेका प्रयास भी करता हुँ? क्या मैं प्रभु के वचन को मेरे हृदय के गहराई को छूने देता हूँ? या सांसारिक बातें, धन की लालच, और मेरे वृध्यापे के जिवन के सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान देता हुँ? क्या प्रभु के वचन से मेरा जीवन रूपांतरित हुआ है? क्या मैं दयालु, न्यायी व दूसरों के बारे में चिंता करनेवाला हुँ?

किस प्रकार की जमीन है मेरा जीवन? प्रभु के वचन के प्रती क्या है मेरी प्रतीक्रिया । प्रभु का वचन हमारे जीवन मे कार्य निरत होते समय, जीवन मे आने वाले छोटे मोटे चुनौतियों को किस प्रकार हम हटा सकते हैं? क्या जीवन में खुशी एवं यशश्वी पाने के लिए हम अपनी इच्छाओं का इस्तेमाल करते हैं और प्रभु के सन्देश को दबा देते हैं? हम प्रभु के वचन को किस प्रकार की प्रतीक्रिया देतें हैं? जब की प्रभु अपने वचन को अपने जीवन मे कार्य निरत होने देते हैं ।

चार भाई थे, उन्होंने पढाई के लिए अपना घर छोड दिया और उनमें कोई डाक्टर और वकील बने । बहुत सालों के बाद उनका पुनर्मिलन हुआ । भोजन के बाद वे गप्पे मारने बैटे । उन्होंने चर्चा की, कि उन्होंने किस प्रकार के तोहपे को अपनी बुजुर्ग माँ को दिया जो बहुत दूर रहती थी । और उनके माता ने हर एक के लिए धन्यवाद का पत्र लिखे थे जिन्होंने उसे नहीं पढा था । पहले ने कहा: मैने मम्मी के लिए एक बहुत बडा घर का निर्माण किया है । दूसरे ने कहा मैने मम्मी के लिए एक लाख डालर खर्चा करके घर में एक विशाल हाल तैयार किया है । तीसरे ने कहा मैने मम्मी को घूमने फिरने के लिए एक बडा वाहन भेजा है । चौथे ने कहा: आप को तो मालूम है मम्मी को बैबल पडना बहुत पसन्द है । और आप यह भी जानते हैं की मम्मी अभी बैबल पढ नहीं सकती है क्योंकि उसकी दृष्टी मंद हुई है । मैं सुभसन्देश प्रचारक से मिला जिसने मुझे बताया कि उसके पास एक ऐसा तोता है, जो सारे बैबल को रठ सकता है । १२ साल के निरंतर प्रयास से उसने उसका ट्रेनिंक गिया है । उसके गिरजाघर को एक लाख डालर देने से उसने उस तोते को मुझे दिया, और सच में वह तोता शानदार है । मम्मी को केवल अध्याय और पद संख्या बताना है और वह तोता उसे रठता है । तीनों भाईयों को इसे सुनकर बहुत खुशी हुई । उसके बाद उन्होंने अपने मम्मी ने लिखे धन्यवाद के पत्रों को खोला । मम्मी ने लिखा था: मिल्टन मेरे बेटे आपने जो घर बनाया है वह बहुत बडा है, मैं एक ही कमरे में रहती हुँ परन्तु मुझे पूरा घर साफ करना पडता है । कोई बात नहीं आपको धन्यवाद । मैकल आपने मुझे एक भव्य एवं विशाल सुसज्जित हाल उपलब्द करवाया जहाँ पचास लोग आराम से बैट सकते हैं परन्तु मरे सारे मित्र गण मर चुके हैं, मैने सुनने की शक्ति खो दी है, मैं ठीक से देख भी नहीं सकती हुँ क्योंकि मैं अंधी होती जा रही हुँ, मैं उसका इस्तेमाल नहीं कर सकती हुँ, धन्यवाद आपके अच्चे सोच के लिए । मर्विन मैं तो बहुत बुडी हो चुकीं हुँ, मैं अभी कहीं निकल नहीं सकती । मैं घर पे ही रहती हुँ, मेरा हर सामान घर मे आ जाता है इसलिए मैं गाडी का इस्तेमाल नहीं करती हुँ, आपका विचार अच्चा था, धन्यवाद । प्यारे जेराल्ड, आपको तो बहुत अच्ची समझ है की आपके माँ को क्या जरूरत है । आपने जो चिकन भेजा था उसे मैने पकाया और खाया भी, वह बहुत स्वादीष्ट था ।

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