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Sunday Homilies - October 26, 2014
वर्ष का तीसवाँ इतवार
By फादर वर्गीस पल्लिपरम्पिल

दुनिया में बहुत सारे ऐसे महान व्यक्ति हैं जिन्हें लोग प्यार करते हैं। लेकिन दुनिया में प्रभु येसु के अलावा ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं है जिसने हज़ारों सालों से करोड़ों लोगों का दिल जीत लिया है। पिछले दो हजार सालों से करोड़ों लोगों ने प्रभु येसु को अपने जीवन से ज्यादा, इस दुनिया से ज्यादा और अपने परिवारों से ज्यादा प्यार किया है। खीस्तीय धर्म में बहुत शहीद और संत हैं जिन्होंने प्रभु येसु के प्रति अपने प्यार के कारण अपने जीवन की कुर्बानी दी है। बहुत से लोग इस सदी में भी, जब इन्सान संसार की मोह मायाओं के पीछे भागते हैं, प्रभु येसु के प्यार के प्रति अपना सब कुछ छोड़कर प्रभु येसु का सुसमाचार फैलाने के लिए दुनिया के कोने-कोने में चले जाते हैं तथा येसु की सेवा करते हैं। दुनिया में प्रभु येसु के सिवा ऐसा कोई भी नहीं है जिसने इतने सारे लोगों का दिल इतने सारे सालों से जीत लिया है।

हम पूछ सकते हैं कि क्यों पिछले दो हजार सालों से इतने लोग अपने जीवन से ज्यादा, अपने परिवारों से ज्यादा और संसार से ज्यादा प्रभु येसु मसीह को प्यार करते हैं। यह इसलिये है कि उन्होंने प्रभु येसु के प्यार को अपने जीवन में अनुभव किया है। हमारे प्रभु येसु को प्यार करने से पहले और हमारे उनके प्रति प्यार से ज्यादा उन्होंने हमें प्यार किया है। संत योहन के पहले पत्र अघ्याय 4 वाक्य 19 में ईश्वर का वचन हमसे कहता है, ‘हम प्यार करते हैं क्योंकि उसने पहले हमें प्यार किया है।

दुनिया के हर एक व्यक्ति, चाहे वह छोटा बच्चा हो या बड़ा, अमीर हो या गरीब, यह चाहता है कि लोग उसे प्यार करें, लोग उसका आदर करें। धन्य मदर तेरेसा, जिन्होंने बहुत से गरीबों और अनाथों की सेवा की, ने अपने जीवन के अन्तिम दिनों में यह कहा कि संसार का हर एक मनुष्य भूखा है, चाहे वह अमीर हो या गरीब, लेकिन रोटी के लिए नहीं बल्कि प्यार के लिए।

हम सब यही चाहते हैं कि लोग हमें प्यार करें।   प्रभु येसु के समान दूसरों का प्यार प्राप्त करने का एक ही तरीका है। वह है प्रभु येसु के समान दूसरों को प्यार करना। प्रभु येसु को हम सब प्यार करते हैं क्योंकि प्रभु ने हमसे पहले एवं हम से ज्यादा हमें प्यार किया है। दूसरों से प्यार प्राप्त करने का मार्ग हम प्रभु येसु के जीवन से सीख सकते हैं। जिस प्रकार प्रभु ने हमें हमारे उनसे प्यार करने से पहले और हम से ज्यादा प्यार किया, उसी प्रकार हमें भी चाहिए कि हम लोगों को उनसे पहले और उनसे ज्यादा प्यार करें।

आज के सुसमाचार द्वारा प्रभु येसु हमें उनके समान ईश्वर एवं अपने पड़ोसी को प्यार करने के लिए निमंत्रण देते हैं। संत योहन के सुसमाचार, अध्याय 15 वाक्य 12 में प्रभु येसु अपने शिष्यों को एक आज्ञा देते हैं, ‘जिस प्रकार मैंने तुम लोगों को प्यार किया है उसी प्रकार तुम भी एक दूसरे को प्यार करो। प्रभु येसु हमें उन्हीं के समान प्यार करने के लिए बुलाते हैं। प्रभु येसु के प्यार के कुछ गुणों के बारे में जो हमें अपनाना चाहिए संत पौलुस ने कुरिंन्थियों के नाम के पहले पत्र में लिखा है। वहाँ हम पढ़ते हैं कि प्रेम सहनशील और दयालु है, प्रेम न तो ईर्ष्या करता है न डींग मारता, न घमण्ड करता है। प्रेम अशोभनीय व्यवहार नहीं करता। वह अपना स्वार्थ नहीं खोजता। प्रेम न तो झुँझलाता है और न बुराई का लेखा रखता है। वह दूसरों के पाप से नहीं बल्कि उनके सदाचरण से प्रसन्न होता है और सब कुछ सह लेता है।’’ इन वचनों में प्रभु येसु के प्यार के कुछ गुणों को हम देख सकते हैं और प्रभु हमसे आशा करते हैं कि हम इन गुणों को अपनायें। आइए हम प्रार्थना करें कि ईश्वर की कृपा से हमारे प्यार में भी इन गुणों को हम प्रस्तुत कर सकें।
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