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Sunday Homilies - November 23, 2014
खीस्त राजा का पर्व
By फादर शैल्मोन अंथोनी

खीस्त राजा का पर्व सन् 1925 में संत पापा पीयूस ग्यारहवें द्वारा घोषित किया गया था।  यह पर्व स्वर्गारोहण के आधार पर घोषित किया गया है।  हम विश्वास करते हैं कि येसु पुनरुत्थान के बाद स्वर्ग गए और पिता के दाहिने विराजमान हैं।  संत पौलुस कहते हैं, ईश्वर ने सब कुछ मसीह के पैरों तले डाल दिया है (एफे़सियों 1:21) और वहाँ से वे राज्य करते हैं। 

यहूदियों के लिए ये विचार या शब्द कुछ नये नहीं हैं क्योंकि इस्राएल प्रारंभ से ही ईश्वर को राजा मानते आ रहे हैं।  इसलिए इब्राहिम के समय से लेकर करीबन एक हज़ार पाँच सौ साल तक (1040 ) इस्राएल में यहोवा के सिवा और कोई राजा नहीं था। 

न्यायकर्ताओं के ग्रन्थ, अध्याय 6,7 एवं 8 में हम गिदओन के बारे में पढ़ते हैं।  जब गिदओन ने इस्राएलियों को उनके शत्र्रु मिदयानियों से बचाया तब इस्राएलियों ने उनसे कहा आप हमारे शासक बन जाइए।  आप, आपका पुत्र और आपका पौत्र भी, क्योंकि आपने ही हमें मिदयानियों के हाथों से मुक्ति दिलायी है” (न्यायकर्ता 8:22)  यह सुनकर गिदओन ने उŸार दिया, ‘’मैं तुम्हारा शासक नहीं बनूँगा और न मेरा पु़त्र ही तुम्हारा शासक होगा।  प्रभु ही तुम्हारा शासक होगा” (न्यायकर्ता 8:23)

यहाँ से हमें पता चलता है कि इस्राएल का उनके राजा यहोवा के प्रति कितना आदर था।  हालाँकि यह सही है कि बाद में कई व्यक्तियों ने राजा बनकर इस्राएल पर शासन किया लेकिन वे सब के सब यहोवा के नाम पर शासन कर रहे थे।  परन्तु ये राजा इस्राएल पर अच्छी तरह शासन नहीं कर पाये क्योंकि उनमें बहुत सी कमियाँ थी।

इसलिए यहोवा अपने नबियों द्वारा आनेवाले राजा के बारे में भविष्यवाणी देने लगे जो इस्राएल को अपने दुश्मनों से बचाएगा और ईश्वर की इच्छा के अनुसार इस्राएल पर शासन करेगा।  इस राजा के बारे में यहोवा नबी इसायाह के द्वारा कहते हैं, “वह दाऊद के सिंहासन पर विराजमान होकर सदा के लिए शान्ति, न्याय और धार्मिकता का साम्राज्य स्थापित करेगा” (इसायाह 9:6)

इस भविष्यवाणी के आधार पर इस्राएली जनता अपने राजा को राजमहलों में ढूँढ़ने लगी।  लेकिन उनकी प्रतीक्षा के विपरीत राजाओं के राजा येसु मसीह प्रजा से भी दीन होकर चरनी में जन्म लेते हैं।  राजाओं के राजा के चुपचाप जन्म लेने के बावजूद भी उन्हें देखने के लिए ज्योतिषी और गड़ेरिए आते हैं और उनके सामने सोना जो कि राजत्व का प्रतीक है, लोबान और गन्धरस चढ़ाते हैं।  तब ऐसा लगा कि यह सच्चाई सारी दुनिया को पता लगी है कि येसु राजा हैं।  लेकिन इसके बाद कोई स्पष्टता नहीं है और दुनिया इस पर कोई ध्यान नहीं देती है। 

येसु के बपतिस्मा (मत्ती 3:13) के समय ऐसा लगा कि लोग जान गए हैं कि येसु ईश्वर के पुत्र हैं, इसलिए आनेवाले राजा हैं।  लेकिन इस सच्चाई के सामने पाप का परदा गिर जाता है।  इसलिए उनके सुसमाचार की घोषणा के समय लोग कहने लगते हैं कि वे बढ़ई यूसुफ के बेटे हैं, वे पापियों एवं नाकेदारों के साथ रहते हैं और समाज के नगण्य और तुच्छ लोग उनके शिष्य बन जाते हैं। 

संत योहन के सुसमाचार, अध्याय 6 में हम पढ़ते हैं कि रोटियों के चमत्कार के समय जब लोगों के पेट नश्वर रोटी से भर जाते हैं तो वे येसु को राजा बनाने की कोशिश करते हैं।  लेकिन अनश्वर रोटी देने वाले राजा येसु नश्वर रोटी राजाया रोटी देने वाला राजाबनने की लोगों की इच्छा के विरुद्ध अकेले पहाड़ी की ओर चले जाते हैं।

संत लूकस 19:29-40 एवं मत्ती 21:1-11 में हम येरुसालेम में येसु के प्रवेश के बारे में सुनते हैं।  यहाँ हम देखते हैं कि लोग अपने कपडे़ मार्ग में बिछाते हुए डालियाँ फैलाते हुए गधे पर सवार राजा का स्वागत करते हुए कहते हैं, “धन्य हैं वह राजा जो प्रभु के नाम पर आते हैं! स्वर्ग मंे शान्ति! सर्वोच्च स्वर्ग में महिमा!” (लूकस 19:38)  लेकिन इसके बाद येसु को राजा कहने वाले इन लोगों का पता भी नहीं है।  इतना ही नहीं, जब पिलातुस ने यहूदियों से पूछा, “क्या मैं तुम्हारे राजा को क्रूस पर चढ़वा दूँ? तब वे उŸार देते हैं, ‘कैसर के सिवा हमारा कोई राजा नहीं” (योहन 19:15)  इस प्रकार वे अपने राजा को क्रूस दिलाते हैं। 

सभी अनिश्वितताओं को विराम देते हुए प्रभु येसु अपने सांसारिक जीवन के अन्त में पिलातुस के सामने खडे़ होकर साफ-साफ कहते हैं कि वे राजा हैं (योहन 18:37)  येसु यह सच्चाई बताने के लिए रोमियों के महल का इस्तेमाल करते हैं।  उस समय की सबसे बड़ी राजनैतिक शक्ति रोमियों के महल में खडे़ होकर दुर्बल और तिरस्कृत येसु कहते हैं कि वे राजा हैं।  यह आश्चर्यजनक बात है कि येसु यह सच्चाई उस समय प्रकट करते हैं जब उन्हें सब से अधिक अपमानित किया जाता है।  इसके तुरन्त बाद पिलातुस अनजाने में इस शाश्वत सच्चाई की घोषणा करने का साधन बन जाता है और वह क्रूस पर अनंत सत्य का शीर्षक ईसा नाज़री यहूदियों का राजालिखवाकर इस विरोधाभास को और अधिक पुख्ता बना देता है। 

अपनी जनता द्वारा ठुकराये जाने के बाद भी वे राज्याभिषेक के लिए कलवारी-महल की ओर जाते हैं।  वे सिपाहियों और लोगों के साथ जाते हैं और क्रूस रूपी सिंहासन पर काँटों का ताज़ पहनकर विराजमान होते हैं।  यह राज्याभिषेक उस समय खत्म होता है जब येसु अपने सिंहासन से कहते हैं- सब पूरा हो चुका है  इस प्रकार येसु के राज्य की समाप्ति नहीं बल्कि उसका उद्घाटन होता है, येसु के अनंत राज्य की शुरुआत होती है।  आज के दूसरे पाठ में संत पौलुस कहते हैं कि मसीह मृतकों में से जी उठे हैं और सब पर शासन कर रहे हैं। 

हमारे राजा अन्य राजाओं से अलग हैं।  सामान्यतः हमें देखने को मिलता है कि इस दुनिया में जितने भी राजा हुए हैं उनके लिए प्रजा हमेशा अपना जीवन अर्पित किया करती थी या अपने राजा को बचाने के लिए प्रजा अपनी जान हथेली पर रख कर लड़ाई करती थी।  लेकिन यहाँ एक ऐसे राजा हैं जिन्होंने अपनी प्रजा के लिए, उसकी मुक्ति के लिए इस दुनिया में आकर अपना जीवन अर्पित किया है।  ये सब उन्होंने इसलिए किया कि वे हमें निस्वार्थ प्यार करते हैं।  इस प्रकार आज के पहले पाठ की नबी एजे़किएल की भविष्यवाणी येसु में पूरी हो जाती है। 

लेकिन क्या हम उस राजा को प्यार करते हैं?  येसु राजा हम से कहते हैं, “यदि तुम मुझे प्यार करोगे तो मेरी आज्ञाओं का पालन करोगे” (योहन 14:15)  हमें एक बात पर ध्यान देना होगा कि जैसे हमने सुसमाचार में सुना न्याय के दिन राजाओं के राजा अपने महिमामय सिंहासन पर विराजमान होंगे और हमें उन्हें अपने कर्मों का लेखा देना होगा।  क्या हम अनंतकाल के लिए उनकी प्रजा बनना चाहते हैं?

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